छत्तीसगढ़

कुपोषित से पोषित हो रहे नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले के बच्चे

 

कुपोषित से पोषित हो रहे नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले के बच्चे

कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में पोषण पुनर्वास केंद्रों की बड़ी भूमिका

पुनर्वास केन्द्र से 2 माह में जिले के 150 बच्चे हुए सुपोषित

नारायणपुर सबका संदेस न्यूज़ छत्तीसगढ़– नारायणपुर में संचालित पोषण पुनर्वास केन्द्र का लाभ यहां के कुपोषित बच्चों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत जिले में 5 पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित है। जिसमें नारायणपुर विकासखण्ड में जिला चिकित्सालय तथा ओरछा विकासखण्ड में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ओरछा और रामकृष्ण मिशन आश्रम द्वारा कुंदला, ओरछा तथा आकाबेड़ा में 10-10 बेड वाले पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित हैं। चहकते बच्चे घर की रौनक होते है, जो अपनेे नटखट अंदाज से हर किसी को स्वभाविक रूप से आकर्षित कर लेते हैै। ऐसा ही खूबसूरत नजारा नारायणपुर जिले के पोषण पुनर्वास केन्द्रों में देखने को मिल रहा है। इन केन्द्रों में शारीरिक रूप से कमजोर और कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए विशेष प्रयास किया जा रहा है।

राज्य सरकार इसके प्रति गंभीर है इसके लिए बीते 2 अक्टूबर से प्रदेश भर में कुपोषण मुक्ति के लिए विशेष अभियान प्रारंभ किया गया है। मितानिनों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकों के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती किया जाता है। यहां बच्चे की माता व बच्चे को शिशु रोग विशेषज्ञ की निगरानी में आवश्यक उपचार व पौष्टिक आहार प्रदान किया जाता है। जहां उन्हें स्वास्थ्यवर्धक दवाईयों के साथ ही दूध, खिचड़ी आदि पौष्टिक आहार दिया जाता है।

नारायणपुर जिला चिकित्सालय में अपने बच्चे को पुनर्वास केंद्र में लायी ग्राम बेलगांव निवासी कमलबती ने बताया कि मितानिन की सलाह पर अपने 2 वर्ष के बच्चे सुभाष के साथ विगत 10 दिनों से केन्द्र में रह रही है। नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण व पौष्टिक आहार से बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार आया है। अब वह दिन भर खेलता है और खाने के प्रति रूचि भी बढ़ी है। सुभाष की नटखट हरकतों से अस्पताल के दूसरे मरीज व परिजन भी आकर्षित हो जाते है। इसी तरह ग्राम सरगीपाल की डेढ़ वर्षीय दुर्गेश भी विगत 14 दिनों से पुर्नवास केन्द्र में भर्ती है। दुर्गेश की मां सनबती बाई ने बताया कि पहले वह शारीरिक रूप से कमजोर व गुमशुम रहती थी। लेकिन अब दुर्गेश खूब खेलती है। पुनर्वास केंद्र में आये बच्चो के साथ सभी बच्चे खेलते भी है और केन्द्र के स्टाफ को पहचानने भी लगे हैं। केन्द्र में दस बच्चे अभी स्वास्थ्य लाभ ले रहें हैं। सभी बच्चों के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। बच्चों की माताओं को घर में पौष्टिक आहार तैयार करने के लिए भी बताया जाता है। इसके अलावा पोषण पुर्नवास केन्द्र में स्वास्थ्य संबंधी साफ-सफाई आदि की जानकारी भी दी जाती है।

2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर सरकार द्वारा प्रारंभ की गयी सुपोषण अभियान के तहत् नवम्बर माह तक जिले के गंभीर कुपोषित 150 बच्चों को पुर्नवास केन्द्र में भर्ती कर सामान्य बच्चों के श्रेणी में लाया जा चुका है। मुख्यमंत्री की पहल पर शुरू हुए पुनर्वास केंद्र से पोषित हो रहे बच्चे कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में पोषण पुनर्वास केंद्रों की बड़ी भूमिका है।

 

 

 

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