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Coronavirus: जानिए, क्यों काफी नहीं है 14 दिनों का क्वारंटाइन पीरियड coronavirus patients may show symptoms after twenty eight days of exposure | knowledge – News in Hindi

कोरोना के मामले में लगभग रोज नई जानकारियां सामने आ रही हैं, जो वैज्ञानिकों को नए सिरे से स्टडी करने को मजबूर कर दें. मसलन वायरस के अटैक के बाद से इसके लक्षण सामने आने तक का वक्त. World Health Organisation (WHO) के मुताबिक 5 से 14 दिनों के भीतर संक्रमित में कोरोना के लक्षण दिखने लगते हैं. उसी के क्वारंटाइन रिकमंडेशन के अनुसार कोरोना संदिग्धों को 14 दिनों के क्वारंटाइन में रखा जा रहा है. लेकिन अब कई मामले आए हैं, जिनमें लगभग महीनेभर बाद मरीज में लक्षण दिखे.

क्या दिख रहा है
केरल में फॉरेन हिस्ट्री वाली एक 54 वर्षीय महिला 18 मार्च को लौटने के बाद से होम क्वारंटाइन में थी. महीनेभर बाद उसमें कोरोना के लक्षण दिखे और तब जाकर जांच में वो पॉजिटिव पाई गई. केरल के ही अधिकारियों के मुताबिक वे लगभग ऐसे एक दर्जन मामले देख चुके हैं, जिसमें 28 दिनों के क्वारंटाइन के बाद लोग पॉजिटिव आए हैं. केरल के अलावा देश और दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में WHO की सलाह के मुताबिक 14 दिनों का क्वारंटाइन पीरियड रखा गया है. WHO का मानना है कि इसी अवधि या incubation period में मरीज में बीमारी के लक्षण दिख जाते हैं.

WHO की सलाह के मुताबिक 14 दिनों का क्वारंटाइन पीरियड रखा गया है

क्या है इनक्यूबेशन पीरियड
शरीर के वायरस से संक्रमित होने के बाद से लक्षणों के सामने आने का वक्त इनक्यूबेशन पीरियड कहलाता है. WHO के अनुसार SARS-CoV-2 से संक्रमित 97 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों में 11.5 दिनों के भीतर इसके लक्षण सामने होते हैं. वहीं औसत इनक्यूबेशन पीरियड 5 दिन है.

अमेरिका की Johns Hopkins University ने भी यही माना कि लगभग 98 प्रतिशत मरीजों में कोरोना के लक्षण 11 दिनों में दिखने लगते हैं, जो माइल्ड से लेकर सीवियर तक हो सकते हैं. Johns Hopkins University ने इस स्टडी में 10000 लोगों को शामिल किया और 14 दिनों के क्वारंटाइन के दौरान उनका अध्ययन किया. स्टडी में देखा गया कि 14 दिनों बाद केवल 101 लोगों में ही कोरोना के लक्षण दिखे जो जांच में पॉजिटिव भी आए.

केरल में म्यूटेशन का डर
अब केरल में आ रहे इन मामलों को देखते हुए वहां के हेल्थ एक्सपर्ट डर जता रहे हैं कि कहीं वहां के मरीजों में वायरस का म्यूटेशन तो नहीं हो रहा है. यही वजह है कि केरल में विदेश से लौटे या फिर मरीज के संपर्क में आए सभी लोगों का क्वारंटाइन के बाद भी कोरोना टेस्ट हो रहा है. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में केरल के वरिष्ठ मेडिकल अधिकारी के नारायण नायक ने बताया कि वे 14 की बजाए 28 दिनों के क्वारंटाइन का पालन करवा रहे हैं और इसी बीच लगातार उनकी मेडिकल जांच हो रही है. वे कहते हैं कि जो वायरस अभी सबके लिए नया है, उसके बारे में 14 दिनों का निश्चित नियम नहीं बनाया जा सकता.

संक्रमित होने के बाद से लक्षणों के सामने आने का वक्त इनक्यूबेशन पीरियड कहलाता है

केरल से मिलता -जुलता ही एक मामला चीन के वुहान में देखने में आया था. वहां एक शख्स में 27वें दिन कोरोना के लक्षण दिखे थे.

चीन में हुई सबसे बड़ी स्टडी
चीन में हाल ही में हुई एक स्टडी भी बताती है कि कोरोना के मामले में 14 दिनों का इनक्यूबेशन पीरियड मान लेना गलत है. वहां साल 2003-04 में फैले रेस्पिरेटरी सिंड्रोम सार्स की खोज करने वाले वैज्ञानिक Zhong Nanshan के नेतृत्व में एक्सपर्टस् की एक टीम ने ये देखने की कोशिश की कि वायरस के संपर्क में आने के बाद किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण दिखने में कितना वक्त लगता है. इसके लिए चीन के 31 प्रातों में 522 अस्पतालों से 1,099 कोरोना संदिग्धों को लिया गया. इसमें मरीजों की औसत उम्र 47 थी. स्टडी में देखा गया कि मरीजों में लक्षण 5 दिनों से लेकर 28 दिन तक भी सामने आ सकते हैं.

ये है डर
यानी अगर किसी संदिग्ध को 14 दिनों बाद ये मानकर क्वरंटाइन से हटा दिया जाए कि वो संक्रमित नहीं, तो ये वायरस को फैला सकता है. WHO के क्वारंटाइन रिकमंडेशन पर सवाल उठाने वाली ये अबतक की सबसे बड़ी स्टडी मानी जा रही है जो इतने लोगों पर एक साथ की गई.

केरल से मिलता -जुलता ही एक मामला चीन के वुहान में देखने में आया था

अब केरल के मामलों को देखते हुए ये स्टडी ठीक दिखती है. वहीं WHO के अलावा Centers for Disease Control and Prevention (CDC) भी कोरोना संदिग्धों को निगरानी के लिए Centers for Disease Control and Prevention भी जो क्वारंटाइन रिकमंडेशन दे रहा है, वो 14 दिन ही है. हालांकि खुद हमारे देश में आ रहे कई मामलों को देखते हुए केरल के बाद झारखंड के जमशेदपुर में भी स्थानीय स्तर पर दूसरे प्रदेशों से आए संदिग्धों को 14 दिनों की बजाए 28 दिनों के क्वारंटाइन पर रखा जा रहा है.

वैसे कोरोना के ट्रेंड को समझने की इसलिए भी कोशिश की जा रही है क्योंकि अबतक ये दुनिया के लगभग सभी देशों में पहुंच चुका है. कुल संक्रमितों की संख्या 23 लाख 40 हजार से ऊपर हैं, वहीं मौतों का आंकड़ा भी 1 लाख 60 हजार से ज्यादा हो चुका है. अमेरिका इस वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है तो भारत भी संक्रमित देशों की सूची में 17वें नंबर पर आ चुका है.

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