बालगीत, बातचीत और गतिविधियाँ : भाषा शिक्षण का एक प्रभावी प्रयास

बालगीत, बातचीत और गतिविधियाँ : भाषा शिक्षण का एक प्रभावी प्रयास
प्राथमिक शाला रोहदी में बम्हनीडीह ज़ोन के 3 संकुल (पुछेली,बम्हनीडीह एवं भवरेली) के पहली एवं दूसरी पढ़ाने वाले 12 शिक्षकों एवं 1 आंगनवाड़ी शिक्षिका की उपस्थिति में 14 बच्चों के साथ शिक्षक गुलज़ार बरेठ ने कक्षा आधारित शिक्षण प्रदर्शन (Demo Class) किया। यह कक्षा प्रदर्शन बीईओ एवं बीआरसी के मार्गदर्शन व संकुल समन्वयक उमेश तेम्बुलकर और आयुष्मान कर्मशील की उपस्थिति में हुआ।बम्हनीडीह ब्लॉक में यह तीसरा कक्षा आधारित शिक्षण प्रदर्शन था।
सत्र के शुरुआत में CAC उमेश तेंबुलकर सर ने कक्षा प्रदर्शन एवं अवलोकन के संदर्भ में अपनी बात रखी।उन्होंने कहा कि यह कोई कार्यशाला नहीं है और न ही कोई विशेष प्रशिक्षण। आप सभी शिक्षक कक्षा प्रदर्शन का गहनता से अवलोकन कीजिए और यदि आप को लगता है कि सीखने-सिखाने का अंदाज एवं तरीका बेहतर है जिससे बच्चों को सीखने में सहजता होगी तो उसे आप सभी अपने-अपने कक्षा में जरूर करके देखिएगा। कक्षा को और बेहतर कैसे बनाया जाय इस संबंध में भी अपना सुझाव दीजिएगा।
गुलज़ार सर ने आज की कक्षा की शुरुआत बच्चों के अभिवादन से किया। दैनिक बातचीत के बाद शिक्षक ने बालगीत से कक्षा शिक्षण का शुरुआत किया। कक्षा में लगे प्रिंट रिच से शिक्षक ने पूर्व दिनों में किए गए कार्यों और अनार-आम, ओखली-औरत , एडी-ऐनक बालगीतों को बच्चों को कराने का अवसर दिया। तीन बच्चों ने इन तीन अलग-अलग बालगीत हाव-भाव के साथ किया।
इसके बाद शिक्षक ने क वर्ग के सभी अक्षरों क ख ग घ और ङ को सिखाने का प्रक्रिया शुरू किया।
मौखिक बातचीत के माध्यम से कुछ पक्षियों के बारे में बच्चों से चर्चा किया। इस दौरान शिक्षक ने बच्चों को कबूतर और खरगोश का चित्र दिखाते हुए इसके बारे में बातचीत किया। शिक्षक ने स्वयं ‘क के घर में कबूतर’ बालगीत को हाव-भाव के साथ बच्चों को शामिल करते हुए किया। इसी बालगीत को तीन बच्चों को भी कराया। कविता पोस्टर एवं टीएलएम का उपयोग करते हुए शिक्षक ने बच्चों से क अक्षर पर कम से कम सात बार बातचीत किया। शिक्षक ने कबूतर शब्द को अलग-अलग अक्षरों में तोड़ते हुए ताली की गतिविधि से बच्चों को बताया। इस दौरान कबूतर शब्द को ज़ोर से, आहिस्ता,तेज,धीमे एवं बिना ध्वनि निकाले की गतिविधि कराई गई।
क ध्वनि से परिचित कराते हुए शिक्षक ने क ध्वनि से अन्य शब्दों के बारे बच्चों से पूछा।किसी ने कमल बताया तो किसी ने कौआ किसी ने किरन तो किसी ने कमला। शबच्चे जो भी बताते शिक्षक उसे बोर्ड पर लिखते जाते, साथ ही ताली की गतिविधि से पहले अक्षर की ध्वनि पहचानने पर कार्य करते।
क की पहचान के लिए कक्षा में लगे प्रिंट रिच से क अक्षर को पहचानने का अवसर दिया गया। जहां भी क वाले शब्द या क लिखा होता बच्चे उस पर उंगली रखते। इसी प्रक्रिया के बाद शिक्षक ने पुन: एक बार ‘क के घर में कबूतर’ बालगीत किया गया। इसके उपरांत बच्चों को इसी बालगीत कराने का अवसर दिया गया।
अभ्यास पुस्तिका का उपयोग :- अक्षर पहचान की इस कड़ी में बच्चों अभ्यास पुस्तिका का उपयोग करते हुए क से ड. तक लिखने का अवसर दिया गया।
अंत में शिक्षक ने बताया कि अक्षर पहचान के लिए इस तरह से मौखिक बातचीत, ध्वनि जागरूकता डिकोडिंग, पठन लेखन इन सारी प्रक्रियाओं को अपनाने व पर्याप्त अवसर देने से बच्चे समझ के साथ सीख पाते हैं।
खुली चर्चा :- कक्षा शिक्षण प्रदर्शन के बाद चर्चा का सत्र रखा गया। राजेश नायक सर ने पूछा कि हिन्दी सिखाने के वे प्रत्येक दिन कितना समय देते हैं।गुलज़ार ने बताया कि 1 से 1.30 घंटा।सब बच्चे जब ध्वनियों से परिचित हो जाते हैं तो उन्हें पाठ पढ़ाने में समस्या नहीं होती है।वीरेंद्र दुबे ने भी अपना अनुभव साझा किया। शसभी शिक्षकों ने रनिंग बोर्ड का बेहतर इस्तेमाल को सराहा और कक्षा प्रदर्शन को आत्मसात किया।



