घर नहीं बंकर है ये! 200 साल पहले अंग्रेज भी नहीं हिला पाए एक भी ईंट, बिना सरिया-सीमेंट के कैसे बना मजबूत

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव जनपद के सिंहपुर गांव में एक ऐसा घर है, जो करीब 200 साल पुराना बताया जाता है. इस घर की खासियत सिर्फ इसकी उम्र नहीं, बल्कि उससे जुड़ा इतिहास भी है.
आज भी इस घर में तिवारी परिवार की आठवीं पीढ़ी रह रही है. गांव के लोग इस मकान को देखकर हैरान रह जाते हैं क्योंकि इतने साल बीतने के बाद भी यह लगभग उसी हालत में खड़ा है, जैसा पहले था.पीढ़ियों से चला आ रहा है जमींदारी का इतिहास
जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले श्रवण तिवारी बताते हैं कि उनके परिवार में जमींदारी का इतिहास कई पीढ़ियों पुराना है. अंग्रेजों के समय में उनके पुरखों के पास करीब पांच गांवों की जमींदारी हुआ करती थी. सिंहपुर गांव उस समय छतरपुर रियासत के अंतर्गत आता था. उनके दादा, परदादा और उनसे भी पहले की पीढ़ियां इसी इलाके में जमींदारी संभालती थीं.जगन्नाथ प्रसाद तिवारी ने बनवाया था यह मकान
श्रवण तिवारी बताते हैं कि उनके पूर्वज जगन्नाथ प्रसाद तिवारी ने इस मकान का निर्माण करवाया था. उस समय सीमेंट और सरिया का इस्तेमाल नहीं होता था, इसलिए यह घर चूना और ईंटों से बनाया गया था. करीब 200 साल पहले बने इस मकान को उस समय तीन मंजिला बनाया गया था, जो उस दौर में काफी खास माना जाता था. घर के बाहर देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां बनाई गई थीं और मुख्य द्वार पर एक बड़ा और मजबूत किवाड़ लगाया गया था, जो आज भी उसी तरह मौजूद है.
अंग्रेज अफसर ने चलाई थीं गोलियां
इस घर से जुड़ी एक और दिलचस्प कहानी भी है. श्रवण तिवारी बताते हैं कि 14 जनवरी 1931 को जब सिंहपुर गांव में जलियांवाला बाग जैसी घटना हुई थी, तब अंग्रेजों ने गांव में गोलियां चलाई थीं. उस समय नौगांव के पॉलिटिकल एजेंट लार्ड फिशर ने खुद इस घर की तरफ भी गोलियां चलाई थीं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी गोलियां चलने के बावजूद इस मकान की दीवारों में कोई दरार तक नहीं आई.
सात पीढ़ियां गुजार चुकी हैं जिंदगी
तिवारी परिवार के अनुसार इस घर में उनकी सात पीढ़ियां रह चुकी हैं और अब आठवीं पीढ़ी यहां रह रही है. इतने सालों में इस घर में कोई बड़ा मरम्मत का काम भी नहीं कराया गया क्योंकि इसकी जरूरत ही नहीं पड़ी. श्रवण तिवारी बताते हैं कि पुराने समय में चूना और लकड़ी से बने घर गर्मी में ठंडक देते थे. यही वजह है कि आज भी इस घर में गर्मियों में कूलर या पंखे की ज्यादा जरूरत महसूस नहीं होती. बरसात के मौसम में भी इस घर की दीवारों से पानी नहीं रिसता. यही कारण है कि यह 200 साल पुराना मकान आज भी मजबूती के साथ खड़ा है और इतिहास की एक अनोखी मिसाल बना हुआ है



