4 बार मिली असफलता, पर नहीं मानी हार: बिना कोचिंग मजदूर का बेटा बना IAS, परिवार की खुशियों को लगे पंख

रायबरेली। गरीबी और तंगहाली में जीवन गुजार रहे एक मजदूर के बेटे ने दृढ़ निश्चय और पक्के इरादों की बदौलत देश की प्रतिष्ठित यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में पूरे देश मे 107वीं रैंक लाकर घर-परिवार के सपनों को पंख लगा दिए हैं।गुरुबख्शगंज के चांदेमऊ गांव के रामदेव मजदूरी करते हैं। उनके सबसे छोटे बेटे विमल कुमार ने सेल्फ स्टडी करके पांचवें प्रयास में यह सफलता पाई है। 6 मार्च को दोपहर बाद विमल ने अपना परीक्षा परिणाम गांव मे ही देखा। परिणाम में 107वें स्थान पर अपना नाम देख विमल की खुशी देखने लायक थी। परिवार और गांव के लोग विमल की सफलता पर खुशी बांटने उसके घर पहुंचने लगे।विमल बताते हैं कि उसने कक्षा पांच तक की पढ़ाई गांव के ही प्राथमिक स्कूल से की। छह से दस तक वह महराजगंज के बल्ला बावन बुजुर्ग स्थित नवोदय विद्यालय के छात्र रहे। इसके बाद उन्होने केरल राज्य स्थित एक नवोदय स्कूल में दाखिला लिया और इन्टरमीडिएट की परीक्षा पास की और केरल के ही एक अन्य विद्यालय से आईआईटी की।केरल से दिल्ली आकर विमल ने बीटेक किया। विमल ने कहा कि इस दौरान उन्हे नौकरी के लिए अनेक ऑफर आए, लेकिन वह आईएएस बनने का सपना पूरा करना चाहते थे, इसलिए प्रयास में लगे रहे। परिवार की विपन्नता के कारण उन्होने कभी कोई कोचिंग नहीं ली।
स्वयं तैयारी करते रहे चार बार यूपीएससी की परीक्षा में बैठे। दो बार मेंस मे असफल हुये जबकि दो बार इंटरव्यू देने के बाद भी सफल नहीं हुए। विमल ने बताया कि 2025 मे उन्होने पांचवीं बार परीक्षा दी। मेंस क्लियर हुआ तो इंटरव्यू के लिए बुलावा आया। विमल की माने तो इस बार वह अपनी सफलता को लेकर आश्वस्त थे।
उन्होंने कहा कि उन्हे आईएएस संवर्ग की सेवा का अवसर मिलेगा और यही उनका लक्ष्य था। विमल अपने पिता रामदेव व माता सियावती की सबसे छोटी संतान हैं। सबसे बड़ा भाई पुष्पेंद्र विदेश मे मजदूरी करता है, जबकि उससे छोटा अजीत स्थानीय एक बैंक में संविदा पर नौकरी करता है।
उसकी दो बहनें मीरा व आरती हैं, दोनों का विवाह हो चुका है। दोनों भाई भी विवाहित हैं जबकि विमल कुमार को अभी गृहस्थी बसानी है। विमल की सफलता पर सभी खुश है। समूचा गांव गौरवांवित है। जिले का नाम रौशन हुआ है।




