कवर्धाछत्तीसगढ़

कवर्धा। एक ही जीवन मे कई उपलब्धियां हासिल किए स्व.अजित जोगी – सुनील केशरवानी

कवर्धा में स्व.अजित जोगी जी के पुण्यतिथि पर कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें पूष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दिया गया

सर्वधर्म को समान मानने वाले व्यक्ति, गरीब किसान, मजदूरों व महिलाओं के मसीहा थे जोगी जी – सुनील केशरवानी

कवर्धा। स्व.अजित प्रमोद कुमार जोगी जी की द्वितीय पुण्यतिथि जिला मुख्यालय कवर्धा में समस्त पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के उपस्थिति में पुष्प अर्पित कर नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित किया गया।
जिलाध्यक्ष श्री सुनील केशरवानी जी ने बताया कि अजित जोगी वह नाम है जो युगों-युगों तक याद रखा जाएगा छत्तीसगढ़ सहित पूरे विश्व मे ऐसे नेता व कुशल नेतृत्वकर्ता दुबारा नही पैदा हो सकते। मैं उनकी जीवनी बताना चाहूंगा जिससे हमें हिम्मत और ऊर्जा मिलती है जब वर्ष 1986 में मध्यप्रदेश प्रशासनिक सेवा का एक अधिकारी राजनीति के सफर पर निकल पड़ा था वो प्रशासनिक अधिकारी जो कांग्रेस का हाथ थामकर बुलंदी तक पहुंचा. बड़ा आदिवासी चेहरा, विषयों पर पकड़ रखने वाला ऐसा जननेता जिसकी धाराप्रवाह बोली लोगों को ‘जोगी जी जिंदाबाद’ कहने पर मजबूर कर देती थी. 74 साल की उम्र में करीब 33 साल के राजनीतिक करियर के साथ अजीत जोगी ने हमें अलविदा तो कह दिया, लेकिन जब-जब छत्तीसगढ़ की राजनीति का जिक्र होगा, अजीत जोगी के बिना मुकम्मल नहीं होगा.
पूरे भारत में छत्तीसगढ़ प्रदेश की पहचान स्थापित करने में जिन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उनमें छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्व.अजीत जोगी अग्रगण्य हैं. स्व. अजीत जोगी का व्यक्तित्व विलक्षण था. एक प्रशासक, शासक, राजनेता, लेखक, रचनाकार, विचारक, चिंतक, खेलप्रेमी, अदम्य साहस और इच्छाशक्ति जैसी अनेक विवधताएं उनमें समाहित थीं. अध्ययन में गहरी रुचि रखने वाले स्व.जोगी की स्मरण शक्ति अद्भुत थी.
श्री केशरवानी के बताया कि तत्कालीन मध्यप्रदेश और अब छत्तीसगढ़ प्रदेश के गौरेला में 29 अप्रेल 1946 को एक साधारण अध्यापक दंपत्ति के परिवार में अजीत जोगी का जन्म हुआ, और 29 मई 2020 को निधन. इस बीच की जीवन यात्रा में अजीत जोगी ने अनेक कीर्तिमान गढ़कर अपने ही नाम अजीत को सार्थक किया. आरंभ से ही अजीत को चुनौतियां देने और चुनौतियों का सामना करने में आनंद आता था. पिता से शिकार के दांव पेंच की कला बाल्यकाल में ही सीखकर इनका प्रयोग अपने राजनीतिक जीवन में भरपूर किया. शिकारी की भांति घात लगाना वार करना और शिकार करना अजीत जोगी की जीवनशैली का अविभाज्य अंग है. अजीत जोगी की संकल्प शक्ति उन्हें अपराजेय बनाती थी वह छत्तीसगढ़ को एक पहचान देने के साथ करोड़ो लोगो के दिलो पर अपनत्व की वजह से राज करने लगे सर्वधर्म को साथ लेकर चलना व हमेशा गरीब किसान, मजदूर व महिलाओं के लिए एक मसीहा साबित हुए। अजित जोगी जी ऐसे महापुरुष है जिनका नाम युगों तक याद रखा जाएगा आज उनके द्वितीय पुण्यतिथि पर उन्हें व उनके विचारों को याद करते हुए नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित करते है।
प्रदेश सचिव लक्ष्मीचंद जैन सहित जिलाउपाध्यक्ष आफताब राजा, रूपेश मानिकपुरी, नीलेश सोनी, दलीचंद ओगरे, अनुसूचित जाति जिलाध्यक्ष गणेश पात्रे, हीरो जांगड़े छात्र संघ जिलाध्यक्ष रंजीत वर्मा, बिहारी पटेल, जे.डी मानिकपुरी, मोती टेकाम, ईश्वरी साहू, रफीक खान, वचंदास मानिकपुरी, जगदीश बंजारे, चेतन वर्मा, फुलकेश साहू, सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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