वनांचल क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की सतत एवं प्रभावी पहल

वनांचल क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की सतत एवं प्रभावी पहल
सक्रिय सर्विलेंस, समय पर जांच, पूर्ण उपचार और मच्छर नियंत्रण गतिविधियों पर विशेष जोर
कवर्धा, 10 सितंबर 2026। कबीरधाम जिले के वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। जिले में मलेरिया नियंत्रण के लिए समय पर बुखार जांच, मलेरिया की जांच, पॉजिटिव मरीजों का पूर्ण उपचार, निरंतर निगरानी एवं मच्छर नियंत्रण गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
विशेषकर वनांचल एवं मलेरिया संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा सक्रिय सर्विलेंस कर ग्रामीणों तक पहुंच बनाई जा रही है। स्वास्थ्य दलों द्वारा घर-घर जाकर मलेरिया की जांच, पॉजिटिव मरीजों का समय पर उपचार तथा आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। मितानिन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं मैदानी अमला ग्रामीणों के साथ मिलकर लोगों को नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने तथा बुखार आने पर तत्काल मलेरिया जांच कराने के लिए जागरूक कर रहे हैं। मलेरिया रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कैडरों को प्रशिक्षित भी किया गया है।
जिले के मलेरिया संवेदनशील क्षेत्रों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एकीकृत वेक्टर प्रबंधन के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसके तहत मच्छररोधी कीटनाशक दवा घोल का छिड़काव, लार्वा नियंत्रण, लार्वीसाइड का उपयोग तथा मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान एवं नियंत्रण जैसी गतिविधियां की जा रही हैं। इसके साथ ही मलेरिया प्रभावित ग्रामों में समय-समय पर कीटनाशक मच्छरदानी का वितरण भी किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. डीके तुरे ने बताया कि जिले के चार विकासखंडों में मलेरिया के प्रकरण अब मुख्य रूप से बोड़ला के कुछ ग्रामों तक सीमित रह गए हैं, जबकि अन्य विकासखंडों में मलेरिया के प्रकरण काफी कम हो गए हैं। इसके परिणामस्वरूप जिले का वार्षिक परजीवी सूचकांक विगत वर्षों की तुलना में वर्ष 2025 में कम हुआ है। वर्ष 2026 में भी मलेरिया प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान के माध्यम से व्यापक स्तर पर मास स्क्रीनिंग एवं मलेरिया जांच की जा रही है। दूरस्थ ग्रामों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए माइक्रो-प्लानिंग के आधार पर मैदानी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। पूर्व योजना के अनुरूप राष्ट्रीय नियंत्रण रोग केंद्र की टीम द्वारा बोड़ला के वनांचल ग्रामों में एंटोमोलॉजिकल एवं पैरासाइटोलॉजिकल गतिविधियां भी की गई हैं।
मलेरिया नियंत्रण केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें अन्य विभागों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से अंतर्विभागीय समन्वय बैठकें आयोजित की जा रही हैं। ग्रामीणों को नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने, घर एवं आसपास पानी जमा नहीं होने देने तथा बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन संबंधी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण मलेरिया से बचाव के उपायों को अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल कर सकें।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि बुखार को हल्के में न लें और तत्काल मलेरिया की जांच कराएं। मलेरिया की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई दवा का निर्धारित अवधि तक पूर्ण उपचार लें। रात में सोते समय मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें तथा घर एवं आसपास मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने में सहयोग करें। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मलेरिया नियंत्रण के लिए घर-घर जाकर मच्छररोधी कीटनाशक दवा का घोल छिड़काव एवं रात्रिकालीन मलेरिया जांच जैसी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। विभाग ने नागरिकों से इन गतिविधियों में सहयोग करते हुए मलेरिया मुक्त एवं स्वस्थ कबीरधाम के निर्माण में सहभागी बनने की अपील की है।
दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास
दूरस्थ क्षेत्रों की भौगोलिक एवं पहुंच संबंधी चुनौतियों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मैदानी स्वास्थ्य अमले के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में नियमित भ्रमण, बुखार सर्वे, मलेरिया जांच एवं उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल मलेरिया के मामलों का उपचार करना नहीं, बल्कि मलेरिया संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना और ग्रामीण समुदाय को सुरक्षित रखना है। इसके लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।


