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हनुमान अंश’ ने फिर जगाई महाराजजी की कथा—जानिए कौन थे नीम करौरी बाबा,

बाबा के नाम को लेकर कई कथाएं और परंपराएं प्रचलित हैं। उनमें सबसे चर्चित कथा रेल यात्रा से जुड़ी है।

नीब करौरी बाबा: हनुमान भक्ति से मानव सेवा तक की अद्भुत यात्रा

‘हनुमान अंश’ ने फिर जगाई महाराजजी की कथा—जानिए कौन थे नीम करौरी बाबा,
कैसे पड़ा नाम और क्यों आज भी दुनिया भर में गूंजता है उनका प्रेम, सेवा और भक्ति का संदेश

विशेष रिपोर्ट | सबका संदेश
अभिताभ नामदेव जिलाध्यक्ष कबीरधाम नामदेव समाज कल्याण समिति (प्रधान संपादक भारत सरकार अखबार आर एन आई प्राप्त)

भारत की संत परंपरा में कुछ संत ऐसे हुए हैं, जिनका प्रभाव उनके जीवनकाल से कहीं आगे तक दिखाई देता है। नीब करौरी बाबा, जिन्हें देश-दुनिया में नीम करौली बाबा, नीम करोली बाबा और महाराजजी के नाम से भी श्रद्धापूर्वक जाना जाता है, ऐसे ही संतों में शामिल हैं।

भगवान हनुमान के अनन्य भक्त माने जाने वाले बाबा का जीवन सादगी, भक्ति, प्रेम और मानव सेवा से जुड़ा रहा। आज उनके जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ के कारण नई पीढ़ी के बीच भी बाबा की कथा एक बार फिर चर्चा में है। फिल्म 7 अगस्त 2026 को भारत में रिलीज हुई और इसके लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी हैं।

कौन थे नीब करौरी बाबा?

बाबा के जन्म और शुरुआती जीवन से जुड़े विवरणों में अलग-अलग स्रोतों में कुछ अंतर दिखाई देता है। उनके जीवन से संबंधित परंपराओं में उन्हें उत्तर प्रदेश के अकबरपुर क्षेत्र से जोड़ा जाता है।

उनका नाम विभिन्न स्रोतों में अलग-अलग रूपों में मिलता है। गृहस्थ जीवन में उनका विवाह रामबेटी देवी से हुआ और उनके परिवार में दो पुत्र तथा एक पुत्री का उल्लेख मिलता है।

बाद के जीवन में उनका झुकाव साधना, भक्ति और आध्यात्मिक सेवा की ओर बढ़ता गया। भक्त उन्हें प्रेम से ‘महाराजजी’ कहकर पुकारने लगे।

नीब करौरी से ‘नीम करौली’ तक कैसे पड़ा नाम?

बाबा के नाम को लेकर कई कथाएं और परंपराएं प्रचलित हैं। उनमें सबसे चर्चित कथा रेल यात्रा से जुड़ी है।

भक्तों में प्रचलित मान्यता के अनुसार, एक बार बाबा ट्रेन में बिना टिकट यात्रा कर रहे थे। उन्हें नीब करौरी गांव के पास ट्रेन से उतार दिया गया। कथा के अनुसार, बाबा के उतरने के बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। रेलवे अधिकारियों ने उनसे वापस ट्रेन में बैठने का अनुरोध किया। बाबा के ट्रेन में बैठने के बाद ट्रेन चल पड़ी।

इसी घटना के कारण उनका संबंध नीब करौरी नामक स्थान से जुड़ा और वे नीब करौरी बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए। समय के साथ नीम करौली बाबा नाम अधिक प्रचलित हो गया।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ट्रेन वाली घटना भक्तों में प्रचलित चमत्कारिक कथा है। इसे प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के बजाय श्रद्धा और लोक-परंपरा के रूप में देखना उचित है।

कैंची धाम बना आध्यात्मिक पहचान

नीम करौरी बाबा की आध्यात्मिक विरासत से सबसे प्रसिद्ध रूप से जुड़ा स्थान है कैंची धाम, उत्तराखंड।

आज कैंची धाम देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां बाबा की स्मृतियों और हनुमान मंदिर से जुड़ी परंपरा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।

बाबा की शिक्षाओं का केंद्र किसी जाति, वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं था। उनके संदेश में प्रेम, सेवा, भक्ति और मानवता को विशेष स्थान मिलता है।

‘सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो’

महाराजजी की शिक्षाओं को उनके भक्तों द्वारा प्रेम और सेवा के संदेश से जोड़ा जाता है।

उनके जीवन से जुड़ी आध्यात्मिक भावना का सार यही माना जाता है कि ईश्वर की भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। भूखे को भोजन देना, जरूरतमंद की सहायता करना और हर मनुष्य के प्रति प्रेम रखना भी ईश्वर की सेवा है।

यही संदेश आज भी उनके अनुयायियों को प्रेरित करता है।

हनुमान जी से गहरा संबंध

नीम करौरी बाबा भगवान श्री हनुमान के अनन्य भक्त माने जाते थे। उनके जीवन और आश्रमों में हनुमान उपासना का विशेष स्थान रहा।

उनके अनेक भक्त उन्हें हनुमानजी का अंश या स्वरूप मानते हैं। हालांकि यह श्रद्धा और आस्था का विषय है, इसलिए इसे ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में नहीं बल्कि भक्तों की मान्यता के रूप में समझना चाहिए।

‘हनुमान अंश’  फिर पहुंचाई बाबा की कथा नई पीढ़ी तक

नीम करौली बाबा के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बाबा की कहानी को बड़े पर्दे के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया है।

फिल्म का लेखन और निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है और नीम करौली बाबा की भूमिका शोभिनव सत्या ने निभाई है। फिल्म के आधिकारिक विवरण में इसे बाबा के जीवन से प्रेरित आध्यात्मिक सिनेमाई यात्रा बताया गया है, न कि पारंपरिक अर्थों में पूर्ण बायोपिक।

  1. फिल्म की एक दिलचस्प घटना भी सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, शूटिंग के पहले दिन मूल अभिनेता के बीमार पड़ने के बाद शोभिनव सत्या को यह भूमिका मिली। उन्होंने बाद में बताया कि इस भूमिका को निभाना उनके लिए केवल अभिनय नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव जैसा रहा।

फिल्म को शुरुआत में बड़े प्रचार का सहारा नहीं मिला, लेकिन दर्शकों की प्रतिक्रिया और माउथ-ऑफ-वर्ड के कारण इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। बाद में यह 2026 की चर्चित सफल फिल्मों में शामिल हो गई।

फिल्म में दिखी घटनाएं और वास्तविक इतिहास

‘हनुमान अंश’ को समझते समय एक बात ध्यान रखना जरूरी है।

इतिहास — वे घटनाएं जिनका दस्तावेजी आधार उपलब्ध है।

भक्तों की मान्यता — बाबा से जुड़े चमत्कार, आध्यात्मिक अनुभव और लोक-कथाएं।

सिनेमा — इन घटनाओं और आध्यात्मिक विचारों की कलात्मक प्रस्तुति।

इसलिए फिल्म में दिखाई गई हर घटना को ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं माना जाना चाहिए। फिल्म का उद्देश्य बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक संदेश को भावनात्मक एवं सिनेमाई रूप में दर्शाना है।

विदेशों तक पहुंचा महाराजजी का प्रभाव

नीब करौरी बाबा की शिक्षाओं का प्रभाव भारत से बाहर भी पहुंचा। उनके जीवन और विचारों से प्रभावित होने वाले विदेशी साधकों में राम दास का नाम विशेष रूप से लिया जाता है।

आज बाबा की शिक्षाएं, उनके आश्रम और उनसे जुड़ी आध्यात्मिक परंपराएं भारत के साथ-साथ विदेशों में भी लोगों को आकर्षित करती हैं।

11 सितंबर 1973 को वृंदावन में हुआ देहावसान

बाबा का देहावसान 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में हुआ।

लेकिन उनके देहावसान के बाद भी उनकी आध्यात्मिक विरासत समाप्त नहीं हुई। कैंची धाम सहित उनसे जुड़े अनेक स्थान आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और प्रेरणा के केंद्र बने हुए हैं।

अब बात एक व्यक्तिगत अनुभव की…

एक हनुमान भक्त के रूप में मेरा अपना अनुभव भी इस आस्था से जुड़ा हुआ है।

मेरे जीवन में श्रीराम और भक्त हनुमान से जुड़े अनुभव इतने अधिक हैं कि उनका पूरा वर्णन कर पाना मेरे लिए संभव नहीं है। लेकिन एक घटना आज भी मेरे मन में विशेष रूप से अंकित है।

कबीरधाम, छत्तीसगढ़ में सिलहटी पहुंच मार्ग पर लगभग 3 किलोमीटर पूर्व स्थित हनुमान मंदिर के पास की यह घटना है।

रात्रि का समय था। मेरी बाइक की हेडलाइट बंद थी। मुझे पता था कि आगे हनुमानजी का मंदिर है। जैसे ही मैं मंदिर के सामने से गुजरते हुए “जय श्री राम” बोलकर आगे बढ़ा, उसी समय मेरी बाइक की हेडलाइट अचानक जल उठी।

आगे सड़क पर लगभग 30-40 भैंसों का झुंड चल रहा था।

उस क्षण मुझे महसूस हुआ कि यदि उस समय हेडलाइट नहीं जली होती तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। मेरे लिए वह केवल संयोग नहीं, बल्कि श्रीराम भक्त हनुमान की कृपा थी।

मैं आज भी उस घटना को श्रद्धा से याद करता हूं।

हनुमान भक्ति का मार्ग मुझे दादा जी से मिला

बचपन से ही मेरे दादा जी ने मुझे हर संकट के समय हनुमान भक्ति और श्रीराम नाम का मार्ग बताया।

उन्हें रामायण की एक-एक चौपाई याद थी। उनका जीवन राम नाम और भक्ति से जुड़ा हुआ था।

उनके जीवन की अंतिम घटना भी मेरे लिए आज तक अविस्मरणीय है।

बिना किसी गंभीर बीमारी के उन्होंने एक दिन भोजन करने के बाद परिवार से कहा—

“मेरा समय पूरा हो गया है। आप लोग सीताराम नाम का जाप करो, मैं लेट रहा हूं।”

इसके बाद उन्होंने संसार को विदा कह दिया।

उनका यह विश्वास और राम नाम के प्रति उनकी आस्था आज भी मेरे जीवन की बड़ी प्रेरणा है।

कवर्धा का वह प्राचीन मंदिर, जहां वर्षों से दिन रात हर दिन गूंज रहा है ‘सीताराम’ नाम जाप

विराजित मुख्य रूप से  महादेव

मैं पाठकों को यह जानकारी भी देना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के कवर्धा क्षेत्र में पंचमुखी प्राचीन शिव मंदिर आस्था का एक महत्वपूर्ण स्थान है, जहां लंबे समय से दिन-रात “सीताराम नाम जाप” की परंपरा चली आ रही है।

 

इस मंदिर से मेरा व्यक्तिगत जुड़ाव भी रहा है। करीब 14 वर्ष पूर्व, एक संस्था के प्रमुख के रूप में जुड़े रहने के दौरान मुझे यहां आने और इस आध्यात्मिक स्थल से जुड़े कार्यों को करीब से देखने का अवसर मिला।

इसी दौरान मुझे महाभारत में भीष्म पितामह की भूमिका निभाने वाले अभिनेता मुकेश खन्ना तथा शकुनि मामा की भूमिका निभाने वाले गूफी पेंटल को इस मंदिर का दर्शन कराने का अवसर भी मिला।

मेरे लिए यह केवल एक यात्रा नहीं थी, बल्कि आस्था, सेवा और संस्कृति से जुड़ी एक यादगार अनुभूति थी।

पाठकों से मेरा आग्रह

यदि आप कबीरधाम आएं तो इस प्राचीन मंदिर और यहां चल रहे सीताराम नाम जाप के दर्शन का लाभ अवश्य लें।

किसी धार्मिक स्थल की महानता केवल उसकी प्राचीनता में नहीं होती, बल्कि वहां लगातार गूंजने वाले ईश्वर के नाम, श्रद्धा और सेवा की भावना में भी होती है। और जहां श्री राम नाम का जाप होता है वहां श्री हनुमान होते है तो साक्षात हनुमान जी यहां विराजमान है ही।

 

आज जब ‘हनुमान अंश’ के माध्यम से नीम करौली बाबा की भक्ति और सेवा की कथा देश-दुनिया में चर्चा का विषय बनी है, तब हमें उनके संदेश के मूल भाव को भी समझना चाहिए—

प्रेम करो।
सेवा करो।
भूखे को भोजन दो।
और प्रभु के नाम को अपने जीवन का आधार बनाओ।

मेरे लिए श्रीराम और भक्त हनुमान केवल आस्था के विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा हैं।
नोट: बाबा से जुड़े चमत्कारों एवं कुछ जीवन-प्रसंगों को जहां आवश्यक है, वहां भक्तों की मान्यता अथवा प्रचलित कथा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ‘हनुमान अंश’ को भी बाबा के जीवन से प्रेरित सिनेमाई प्रस्तुति के रूप में समझना उचित है। यह प्रचार नहीं आस्था का वर्णन के रूप में समझा जाए

जय श्री राम।
जय बजरंगबली।

 

सबका संदेश की विशेष प्रस्तुति

अभिताभ नामदेव

संपर्क: 9425569117

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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