छत्तीसगढ़
सकल पदार्थ हैं जग माहीं, करमहीन नर पावत नाहीं।

“सकल पदार्थ हैं जग माहीं, करमहीन नर पावत नाहीं।
“सकल पदार्थ हैं जग माहीं, करमहीन नर पावत नाहीं।
“इस दोहे का अर्थ है कि इस संसार में सभी सुख, संपदाएं और पदार्थ उपलब्ध हैं, लेकिन जो मनुष्य कर्महीन है (पुरुषार्थ नहीं करता), वह उन्हें कभी प्राप्त नहीं कर पाता। यह चौपाई हमें ‘कर्म की प्रधानता’ का बोध कराती है। भाग्य और अवसर सबके द्वार खटकटाते हैं, लेकिन सफलता केवल उसे मिलती है जो आलस्य त्यागकर श्रम करता है। ईश्वर की कृपा भी उन्हीं पर होती है जो कर्म के मैदान में उतरते हैं।
छवि में भगवान श्री राम की तस्वीर है, जिनके हाथ में धनुष और बाण हैं। उनके चारों ओर एक सुनहरा प्रकाश है, जो उनकी दिव्यता को दर्शाता है।




