प्राकृतिक खेती योजना: कागजों में ही बांट दिए ड्रम, हकीकत में यह गांव में पड़े मिले

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना (प्राकृतिक खेती योजना) के तहत खैरागढ़ कृषि विभाग द्वारा 15 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। हालांकि इस पूरे खर्च और योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी जिला पंचायत से लेकर जनपद पंचायत की कृषि समिति के सभापति और सदस्यों को नहीं दी गई है। सदस्यों ने इसे अपने अधिकारों का हनन और पंचायती राज अधिनियम की धाराओं की अवहेलना बताया है।
सूची लेकर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की तो हकीकत और भी चौंकाने वाली निकली। योजना के तहत 400 रुपए की दर से 500 किसानों को ड्रम वितरित किए जाने का दावा किया गया था, जिसके लिए 2 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। जब पड़ताल की गई तो पता चला कि गातापार और चंगुर्दा जैसे गांवों में आधे-अधूरे ड्रम वितरण हुए हैं। चंगुर्दा में तो एक निजी मेडिकल संचालक के घर में कई ड्रम पड़े मिले, जिनमें से अधिकतर फूटे और फटे हुए थे।
ग्राम सेवक के दावे झूठे, अधूरे ड्रम वितरण का मामला ग्राम सेवक अमेन्द्र सिंह कुशवाह का कहना था कि सभी किसानों को ड्रम वितरित कर दिए गए हैं और वे दवाई बनाने लगे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। गातापार निवासी सुरेश कुमार और कुंभलाल धुर्वे ने बताया कि वे पात्र होने के बावजूद ड्रम से वंचित रह गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम सेवक जानबूझकर झूठ बोल रहे हैं और वितरण की सही स्थिति से विभाग को अवगत नहीं कराया गया है, जिससे किसानों का नुकसान हो रहा है।मुझे कुछ नहीं पता, अधिकारी बैठक ही नहीं बुला रहे जनपद पंचायत सभापति दिनेश वर्मा ने मामले पर नाराजगी जताई। कहा मुझे किसी भी प्रकार की खरीदी या खर्च की जानकारी नहीं है। आप बता रहे हैं तो पता चल रहा है। सखी और किसानों का चयन किस माध्यम से हुआ है, यह भी नहीं बताया गया। हम लगातार बैठक बुलाने को कह रहे हैं, लेकिन कृषि अधिकारी न तो बैठक बुला रहे हैं और न ही कोई जानकारी दे रहे हैं। आगामी सामान्य सभा की बैठक में इस पूरे मामले की पड़ताल की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।


