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2250 बीघा में फैला अलवारा झील प्रवासी पक्षियों के चलते बना पर्यटकों का केंद्र, यहां साल भर खिलता है कमल का फूल

कौशांबीः कौशांबी जिले की पहचान बन चुकी अलवारा झील, सर्दियों के मौसम में प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन चुकी है. जैसे ही ठंड का मौसम की शुरुआत होती है, अलवारा झील में जीवन की रौनक बढ़ जाती है. हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी देश और विदेश से उड़कर यहाँ पहुंचते हैं.

इन पक्षियों की चहचहाहट और झील का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है. प्रकृति, शांति और जैव-विविधता का यह अद्भुत संगम, अब ईको-टूरिज़्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है. अलवारा झील लगभग 400 हेक्टेयर में फैली अगर इस अलवारा झील की बीघा की बात करें तो यह 2250 बीघा क्षेत्रफल में बना हुआ है यह प्राकृतिक झील पक्षियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं.अलवारा झील जनपद कौशांबी के मंझनपुर तहसील क्षेत्र में पढ़ती है यह मुख्यालय से 30 किलोमीटर की दूरी पर बना हुआ है. इस झील को अलवारा झील के नाम से जाना जाता है. इस झील में आने वाले साइबेरियन पक्षी की देखरेख के लिए भी यहां पर चौकीदार भी लगे रहते हैं. झीलों की देखरेख करने के लिए नाव से पूरे झील में चक्कर भी लगाते रहते हैं क्योंकि उनको डर रहता है कि आए हुए साइबेरियन पक्षी को कोई शिकार ना कर सके इसलिए उनकी देखरेख के लिए प्राइवेट चौकीदार भी लगे रहते हैं. इसके साथ-साथ चौकीदार आए हुए पर्यटकों को उनके बारे में भी बताते हैं। झील बहुत ही सुंदर और अच्छी देखने को लगती है इसलिए झील पर पर्यटक लोग घूमने के लिए आते हैं.

पक्षियों को देखने के लिए आते हैं पर्यटक

इस अलवारा झील में ठंड के मौसम में साइबेरियन समेत तमाम विदेशी पक्षी आते हैं, और 4-5 महीने बाद वापस चले जाते हैं. आसपास रह रहे लोगों ने बताया कि जब यहाँ पक्षी आते हैं तो पर्यटकों की भी यहाँ भीड़ लग जाती है. दूर-दराज से लोग इस झील की खूबसूरती देखने आते हैं. अलवारा झील करीब 400 हेक्टर अगर बाई की बात कर तो 2250 में फैली है. इस झील में पूरे साल पानी बना रहता है. लोगों की मानें तो झील की जलधारा नदी से मिली है. पानी की उपलब्धता से पूरे साल यहां कमल फूल खिले रहते हैं. झील का खास आकर्षण यहां सर्दियों में आने वाले अनगिनत प्रजाति के साइबेरियन पक्षी है. साइबेरियन पक्षी को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक लोग यहां आते हैं क्योंकि यह अलवारा झील पर्यटकों का केंद्र बन चुका है.

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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