लॉकडाउन के दौरान सड़क हादसों में 198 प्रवासी मजदूरों की गई जान: रिपोर्ट । Report says 198 migrant workers killed in road accidents during lockdown | nation – News in Hindi
राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान कई प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने गृहनगर की हजारों किमी की यात्रा पर निकल पड़े थे (सांकेतिक फोटो, News18)
राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन (Nationwide Lockdown) के दौरान 25 मार्च से 31 मई के बीच कम से कम 1461 रोड एक्सीडेंट (Road Accident) हुये. जिसमें कम से कम 750 लोग मारे गये, जिसमें 198 प्रवासी कामगार (Migrant Workers) भी शामिल थे. आंकड़ों के मुताबिक कम के कम 1390 लोग इस दौरान घायल हुये.
लॉकडाउन के दौरान 25 मार्च से 31 मई के बीच कम से कम 1461 रोड एक्सीडेंट (Road Accident) हुये. जिसमें कम से कम 750 लोग मारे गये, जिसमें 198 प्रवासी कामगार भी शामिल थे. आंकड़ों के मुताबिक कम के कम 1390 लोग इस दौरान घायल भी हुए हैं.
प्रवासियों को ले जाने वाले बस-ट्रक ड्राइवरों की थकान मुख्य वजहों में से एक
लॉकडाउन के दौरान सड़क दुर्घटना में हुई कुल मौतों में से 26.4% उन प्रवासी मजदूरों की थीं, जो अपने घरों की ओर लौट रहे थे. वहीं इन सड़क दुर्घटनाओं में से 5.3% मौतें आवश्यक सेवाओं में लगे कर्मचारियों की हुईं. इसके अलावा इस दौरान 68.3% सड़क पर हुई मौतों में सामान्य नागरिक मारे गये.रिपोर्ट में प्रवासियों को ले जाने के काम में लगे बस और ट्रक ड्राइवरों की थकान, तेज गाड़ी चलाने और सड़कों की खराब बनावट को मौतों की प्रमुख वजह बताया गया है.
उत्तरप्रदेश में सड़क दुर्घटना से सबसे ज्यादा मौतें
रिपोर्ट की गई मौतों में से सिर्फ उत्तरप्रदेश में ही 30% यानी 245 मौतें हुई हैं. जिसके बाद तेलंगाना में 56 मौतें, मध्य प्रदेश में 56 मौतें, बिहार (Bihar) में 43 मौतें, पंजाब में 38 मौतें और महाराष्ट्र में 36 मौतें हुई हैं.
जिन राज्यों में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों की मौतें हुई हैं, उसमें सबसे अधिक मौतों की संख्या वाले पांच राज्य उत्तर प्रदेश (94 मौतें), मध्य प्रदेश (38 मौतें), बिहार (16 मौतें), तेलंगाना (11 मौतें) और महाराष्ट्र (9 मौतें) शामिल हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों की कई सोर्स से जांच के बाद तैयार हुई रिपोर्ट
इस रिपोर्ट को मीडिया में आई रिपोर्ट्स की ट्रैकिंग और खबरों के कई सूत्रों से जांचे जाने के बाद तैयार किया गया है.
आगे के विश्लेषण में पता चलता है कि करीब 27% पीड़ित प्रवासी मजदूर थे, जबकि 5% आवश्यक सेवाओं में लगे कर्मी जैसे पुलिस (Police), डॉक्टर और अन्य रहे हैं. सभी मौतों में से करीब 68% मौतें पैदल चलने वालों, दोपहिया पर चलने वालों और तीन पहिया वाहनों से जाने वालों की हुई है. जिसे वल्नरेबल रोड यूजर्स (VRUs) की कैटेगरी में रखा जाता है.
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First published: June 2, 2020, 9:30 PM IST