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भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्ट लॉकडाउन मॉडल | India becomes worlds largest smart lockdown model | nation – News in Hindi

भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्ट लॉकडाउन मॉडल

मोदी सरकार का रोजमर्रा की चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना लोगों को 21 दिनों तक घरों में बंद रखा. (फाइल फोटो)

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के लॉकडाउन बढाने का आह्वान और आर्थिक गतिविधियों में मिली छूट ये सुनिश्चित करेगी कि कोरोना के खिलाफ भारत (India) की जंग पर इनका कम से कम असर होगा.

इस हेडलाइन को देखकर सबको अचरज जरुर होगा कि कोरोना के खिलाफ जंग में अपनाए गए भारत (India) के लॉकडाउन मॉडल को दुनिया ने सराहा है. घरों में बंद भारत के नागरिकों को थोड़ी दिक्कतें तो हुई, लेकिन पीएम मोदी के आह्वान और मोदी सरकार का रोजमर्रा की चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना लोगों को 21 दिनों तक घरों में बंद रखा. तबलीगी जमात के लोगों के चलते संक्रमण फैला तो जरुर लेकिन इस संकट की घड़ी में लोगों का अनुशासन देखते ही बनता था. कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों का प्रतिशत भी बढने लगा. इस बीच दुनिया के तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्षों से पीएम मोदी की बातचीत जारी रही. जिन चीजों के निर्यात के रोक रखा था, उसे तोड़कर अमरीका, ब्राजील जैसे देशों को भेजा गया. यानि अपना ख्याल रखने के साथ-साथ भारत कोरोना संकट से जूझ रहे दूसरे देशों के लिए मदद का हाथ बढ़ाता रहा.

जाहिर है भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्ट लॉकडाउन माडल के रुप में उभरा है. एक ऐसा मॉडल जो चर्चा, एक दूसरे का हाथ थाम कर केन्द्र और राज्य सरकारों के सहयोग से मजबूती से उभरा है. पूरी की पूरी कवायद लॉकडाउन पार्ट-1 लागू होते ही शुरु हो गयी थी और लॉकडाउन बढ़ाए जाने और लोगों की जिंदगी पटरी पर वापस लाने के लिए युद्ध स्तर पर माथापच्ची भी होने लगी थी. सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी ने खुद समाज के विभिन्न वर्गों के साथ वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा कर रहे थे और महत्वपूर्ण सुझावों पर खुद ही नोट्स ले रहे थे. मुख्यमंत्रियों के साथ अपनी बातचीत में पीएम को बड़े महत्वपूर्ण सुझाव मिले.

पीएम मोदी ने लॉकडाउन में तमाम स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लेने के लिए 11 एमपावर्ड ग्रुप बनाए. इस ग्रुप ने उद्योग जगत, शिक्षा, स्वास्थ्य क्षेत्र के एक्सपर्ट, किसानों के समूहों से इस बात पर चर्चा की कि अगर लॉकडाउन जारी रहता है तो उनके क्षेत्रों में कैसे लोगों को संतुष्ट रखा जाएगा या फिर उनका आने वाले दिनों का कैलेंडर क्या होगा. सूत्र बताते हैं कि इस चर्चा के बाद पीएम मोदी ने खुद भी इन सरकारी और एक्सपर्ट्स के ग्रुप से लंबी बैठकें कीं. पीएम मोदी की कोशिश यही रही कि उन्हें और सरकार को पता रहे कि हर सुझाव को लागू करने के पीछे आम आदमी के लिए क्या अच्छा और क्या बुरा है.राज्यों को बरतनी होगी सख्ती

तमाम मंथन के बाद पीएम मोदी इस नतीजे पर पहुंचे एक ऐसा बेसिक मॉडल तैयार किया जाए जो मिनिमम इनफोर्सिंग गाइडलाइन को लागू कराए. सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी इसके लिए सहमत इस लिए हुए क्योंकि इससे राज्य सरकारों को इसको लागू करने में अडचन नहीं आए और साथ ही उन्हें और ज्यादा नियमों को जोड सकें. लेकिन ये भी सुनिश्चिकत किया गया कि राज्य अपने हिसाब से नए नियम जोड़कर लागू तो कर लें, लेकिन केन्द्र सरकार के निर्देशों को खारिज नहीं कर पाएं. केन्द्र ने ये तय कर दिया कि सोशल डिस्टेंसिग पर कोई समझौता नहीं होगा और राज्य सरकारों को इसे सख्ती से लागू करना होगा. साथ ही चिंता इस बात की भी थी कि एक साथ लोगों की आवाजाही न शुरू हो जाए या फिर भीड़ इकट्ठी नहीं हो जाए. इसलिए फैसला ये हुआ कि सभी सरकारों को हर वक्त सतर्क रहना है और हर स्तर से लोगों की गतिविधि पर नजर भी रखना है.

10 दिन में तैयार किया लॉडकाउन 2.0 का प्लान

सूत्र बताते है कि लॉकडाउन पार्ट-2 का पूरा प्लान तैयार करने में पीएम मोदी और उनकी टीम को सिर्फ 10 दिन लगे. एक्शन प्लान तैयार होते ही पीएम मोदी ने 11 अप्रैल को मुख्यमंत्रियों के साथ अपने संवाद में जान भी और जहान भी का नारा बुलंद किया. संदेश साफ था कि जान है तो जहान है यानि कोरोना से जंग के शुरुआती दौर में आम आदमी की जान बचाने के मकसद से आगे बढ़ते हुए पीएम मोदी अब लोगों के जहान यानि उनकी दुनिया बसाने की भी सोंच रहे हैं. जहां रोजमर्रा मेहनत कर कमाने वाले लोगों को दिक्कतें नहीं हों और लोगों के घरों तक जरूरत का सामान पहुंचना शुरू हो जाए और थोड़ी आर्थिक गतिविधियां भी चालू हो जाएं ताकि जिंदगी पटरी पर आने लगे. तभी तो गृह मंत्रालय की जो गाइडलाइन आई तो साफ हो गया कि था कि कृषि संबंधी गतिविधियां, उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स, जैसी आर्थिक गतिविधियों को छूट देने का प्रावधान दे दिया गया.

साफ है पीएम नरेन्द्र मोदी के लॉकडाउन बढाने का आह्वान और आर्थिक गतिविधियों में मिली छूट ये सुनिश्चित करेगी कि कोरोना के खिलाफ भारत की जंग पर इनका कम से कम असर होगा.

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First published: April 16, 2020, 8:13 PM IST



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