101 वर्षाीय स्व. रामकृपाल गुप्ता का नेत्रदान बना समाज के लिए प्रेरणा

101 वर्षाीय स्व. रामकृपाल गुप्ता का नेत्रदान बना समाज के लिए प्रेरणा
नेत्रदान से जागरूकता व रोशनी का संदेश-कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा
कवर्धा, 27 मार्च 2026। मानवता एवं समाजसेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए 101 वर्षीय स्वर्गीय श्री राम कृपाल गुप्ता द्वारा नेत्रदान किया गया। उनके इस पुनीत कार्य की सर्वत्र सराहना की जा रही है। श्याम नगर निवासी श्री सतीश कुमार गुप्ता (सेवानिवृत्त अनुविभागीय अधिकारी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) के पिता स्व. श्री राम कृपाल गुप्ता (सेवानिवृत्त अभियंता, लोक निर्माण विभाग, मध्यप्रदेश) का 25 मार्च 2026 को प्रातः 7.30 बजे निधन हो गया। वे अपने जीवन के अंतिम समय तक पूर्णतः सक्रिय रहे तथा अपने दैनिक कार्य स्वयं करते थे। स्व. श्री गुप्ता के निधन उपरांत परिवारजनों ने समाज के प्रति जिम्मेदारी का परिचय देते हुए उनके नेत्रों का दान करने का निर्णय लिया। इस कार्य के लिए सेवानिवृत्त इंजीनियर श्री श्याम सुंदर जैन द्वारा परिवार को प्रेरित किया गया, जिनका प्रयास सराहनीय एवं अनुकरणीय है। नेत्रदान की प्रक्रिया शासकीय जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉ. क्षमा चोपड़ा एवं उनकी टीम द्वारा सफलतापूर्वक पूर्ण की गई।
कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने इस पुण्य कार्य के लिए स्व. श्री राम कृपाल गुप्ता के परिवारजनों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्य समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं और दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला लाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कलेक्टर श्री वर्मा ने आमजन से अपील की है कि वे नेत्रदान के प्रति जागरूक बनें और इस पुनीत कार्य में सहभागिता निभाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में योगदान दें। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती अनुपमा तिवारी एवं सिविल सर्जन डॉ. केशव ध्रुव ने भी परिवार के इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। जिला नोडल अधिकारी एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. क्षमा चोपड़ा ने बताया कि नेत्रदान का महत्व अत्यंत बड़ा है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को रोशनी मिल सकती है। यह दान मृत्यु के पश्चात 4 से 6 घंटे के भीतर किया जाता है तथा इसमें केवल कॉर्निया (आंख का पारदर्शी भाग) लिया जाता है। पूरी प्रक्रिया सुरक्षित एवं सम्मानजनक होती है।



