राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत अंतर्राज्यीय क्रॉस बॉर्डर मलेरिया कार्यशाला का हुआ आयोजन

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत अंतर्राज्यीय क्रॉस बॉर्डर मलेरिया कार्यशाला का हुआ आयोजन
कवर्धा, 16 मार्च 2026। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय अंतर्राज्यीय, अंतरजिला क्रॉस बॉर्डर मलेरिया कार्यशाला का आयोजन विकासखंड बोड़ला के रेंगाखारकला में सफलतापूर्वक किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए विभिन्न राज्यों एवं जिलों के स्वास्थ्य विभागों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करना, अनुभवों का आदान-प्रदान करना तथा प्रभावी रणनीति तैयार करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ राजकीय गीत एवं स्वागत गीत के साथ गरिमामय वातावरण में हुआ। उपस्थित अतिथियों का पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया तथा कार्यशाला के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर बताया गया कि मलेरिया एक गंभीर वेक्टर जनित रोग है, जिसका प्रभाव वनांचल एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिक देखा जाता है। इसलिए सीमावर्ती जिलों एवं राज्यों के बीच समन्वित कार्ययोजना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला में मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों के वरिष्ठ अधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें जबलपुर संभाग (मध्यप्रदेश) के जोनल एंटोमोलॉजिस्ट, विश्व स्वास्थ्य संगठन छत्तीसगढ़ के राज्य समन्वयक, मध्यप्रदेश के बालाघाट, मंडला एवं डिंडोरी के जिला मलेरिया अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ के मुंगेली, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव एवं कबीरधाम के जिला मलेरिया अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त कबीरधाम जिले के बोड़ला, पंडरिया, सहसपुर लोहारा एवं कवर्धा विकासखंड के खंड चिकित्सा अधिकारी, बीपीएम, सेक्टर सुपरवाइजर, मितानिन प्रशिक्षक, वीबीडी सलाहकार, टेक्निकल सुपरवाइजर तथा मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए।
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में मलेरिया की वर्तमान स्थिति, सीमावर्ती क्षेत्रों में नियंत्रण की चुनौतियाँ, रोकथाम के उपाय तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा मलेरिया के संचरण, मच्छरों की प्रजातियों, रोकथाम के उपाय, समुदाय आधारित जागरूकता तथा निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाने पर जानकारी दी गई। सत्र के दौरान मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में किए जा रहे मलेरिया नियंत्रण कार्यों, उपलब्धियों एवं चुनौतियों को साझा किया। सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के अधिक आवागमन को देखते हुए संयुक्त सर्वेक्षण, त्वरित जांच, समय पर उपचार तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि मलेरिया उन्मूलन के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाना, मच्छरदानी के उपयोग को बढ़ावा देना, जल जमाव रोकना तथा स्वच्छता बनाए रखना जैसे उपायों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। साथ ही आधुनिक तकनीक के उपयोग, नियमित प्रशिक्षण, निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने के सुझाव दिए गए। कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों एवं सहभागियों ने मलेरिया उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु समन्वित प्रयास करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह कार्यशाला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कबीरधाम के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अंत में सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला का समापन किया गया।



