एक्सपोर्ट बंद होने से मंदी की कगार पर राईस मिल कारोबार, उद्योग पर संकट से मिलर्स परेशान

रामपुर। टांडा का राइस मिल उद्योग इन दिनों संकट से जूझ रहा है। खाड़ी देशों को चावल का निर्यात बंद होने के कारण कई मिलें घाटे में चली गई हैं। स्थिति यह है कि नगर की पुरानी तकनीक की 36 मिलों में से करीब सात बंद हो चुकी हैं, जबकि कई और भी बंद होने की कगार पर हैं। जो नई टेक्निक की मिल हैं वह भी एक्सपोर्ट बंद होने से नुकसान झेल रही हैं।चावल का निर्यात गल्फ कंट्रीज आदि में पहले ही बंद था। इसका कारण देश मे चावल की मंहगाई रोकने तथा रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक खाद्य संकट न हो। इसके बाद फरवरी में चावल का निर्यात खुलने पर राईस मिलर को काफी राहत मिली और लगातार हो रहे घाटे की भरपाई भी होने लगी। लेकिन अमेरिका-ईरान के युद्ध के बीच चावल का निर्यात फिर से बंद होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है।
चावल की ईरान अमेरिका युद्ध से पहले तथा वर्तमान स्थिति
बासमती-1121 पहले सो था जो इस समय 90-95 है। बासमती-1509 पहले 85-90 वर्तमान में 70-75 है। इसी तरह बासमती 1718- सो से 90-95 है। ताज -75 से 70 है। शरबती कच्चा बिना स्टीम का 60 था जो अब 55 है। स्टीम वाला 65 था जो 60 है। बासमती की वेराइटी में ही पांच रुपये से दस रुपये तक की गिरावट आई है।पूंजी की कमी के कारण भी नगर का राईस मिल उद्दोग घाटे का सौदा साबित हो रहा है। पूंजी की कमी के कारण पुरानी टेक्नोलोजी वाले 28 राईस मिल लगातार घाटे में हैं। जबकि छह नए राइस मिल प्लांट लगे हैं। लेकिन नए भी इस समय घाटे मे हैं। वर्तमान में पुरानी करीब सात राईस मिल बंद हो गये हैं।कई राइस मिलों को तोड़कर उसमे प्लाटिंग की जा रही है। अधिकतर राईस मिलें पुरानी टेक्नोलोजी पर ही चल रही हैं। जिस से उनमें क्वालिटी नहीं आ पा रही है। इन राईस मिलों में कच्चे चावल के कारण उनकी बाजार में डिमांड नहीं है। जिसके चलते उन राईस मिलों की स्थिति काफी नाजुक हो गई है। और वह लगातार घाटे में जा रहे है।




