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मुझे तो सिर्फ नुकसान ही नजर आ रहा है’, CM उमर अब्दुल्ला ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जताई आपत्ति

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे यकीन नहीं है कि इस (ट्रेड डील) से क्या लाभ होंगे, लेकिन फिलहाल तो मुझे सिर्फ नुकसान ही नजर आ रहे हैं। अब जिन चीजों को देश में ड्यूटी फ्री एंट्री की इजाजत होगी।जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद अमेरिकी कृषि उत्पादों के भारतीय बाजारों में आने की संभावना को देखते हुए हमारे उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार करना जरूरी है। उन्होंने कहा, “मुझे यकीन नहीं है कि इस (ट्रेड डील) से क्या लाभ होंगे, लेकिन फिलहाल तो मुझे सिर्फ नुकसान ही नजर आ रहे हैं। अब जिन चीजों को देश में ड्यूटी फ्री एंट्री की इजाजत होगी। वे ऐसी चीजें हैं जिनका उत्पादन हम करते हैं जैसे बादाम, अखरोट, सेब और अन्य फल।”

श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (SKUAST-K) में तीन दिवसीय एग्रीटेक मेले का उद्घाटन करते हुए उमर ने कहा कि हालांकि यह कहा जा रहा है कि कीमतों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा, “क्या इसका मतलब यह है कि हमारी उपज कम गुणवत्ता वाली होगी और उनकी अच्छी? हमारे किसानों ने पिछले कुछ सालों में अपनी उपज की गुणवत्ता बढ़ाने में काफी निवेश किया है। नई किस्में उपलब्ध हैं, हाई क्वालिटी वाली उपज है और हम बाजार में बेहतर प्रोडक्ट भेज पा रहे हैं।”

इनोवेशन को दे रहे बढ़ावा- उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा, “इतने सारे निवेश के बाद, अगर उत्पादकों से कहा जाए कि बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद बाहर से आएंगे, तो यह उनके साथ अन्याय होगा।” इस कार्यक्रम में किसानों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके निरंतर प्रयास इस क्षेत्र में कृषि के भविष्य को आकार दे रहे हैं और आधुनिकीकरण और आर्थिक विकास के उद्देश्य से अलग-अलग सरकारी कार्यक्रमों के तहत इनोवेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।

स्थानीय कृषि उत्पादों की क्वालिटी में सुधार करना होगा- उमर अब्दुल्ला

उमर अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए जम्मू-कश्मीर को अपने स्थानीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार करना होगा। उन्होंने कहा कि एग्रो टेक फेस्टिवल जैसी पहल किसानों को विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने और नए बाजार अवसरों तक पहुंचने के लिए एक अहम मंच देगा। इससे आखिरकार जम्मू-कश्मीर के एग्रीकल्चर इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी

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