पाताल से खुद प्रकट हुए भोलेनाथ, नागा साधु के सपने में आए,छिंदवाड़ा के इस मंदिर में एक ही पेड़ पर नीम-पीपल और बरगद

छिंदवाड़ा: भगवान भोलेनाथ का अति प्राचीन पातालेश्वर धाम लोगों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां महाशिवरात्रि पर्व की पूर्व रात्रि से ही श्रद्धालु भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास का केंद्र बने पातालेश्वर धाम का इतिहास ढाई सौ साल से भी अधिक प्राचीन माना जाता है। घने जंगलों और तपस्थली की पावन भूमि पर स्थित यह धाम वर्षों से नागा साधु-संतों की साधना का प्रमुख केंद्र रहा है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है और पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठता है।
पाताल से प्रकट हुए शिवलिंग
श्रद्धालुओं के अनुसार प्राचीन काल में यह स्थान बीहड़ जंगलों से घिरा हुआ था। करीब ढाई सौ वर्ष पूर्व गोस्वामी संप्रदाय के नागा संत गंगागिरी बाबा ने यहां आकर धूनी रमाई थी। कहा जाता है कि एक रात उन्हें स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन हुए और उन्होंने इस पावन स्थल पर अपनी उपस्थिति का संकेत दिया। अगले दिन बाबा ने बताए गए स्थान पर खुदाई कराई, जहां से भूरे रंग का शिवलिंग प्रकट हुआ
भव्य बना हुआ है मंदिर
इसे भगवान का चमत्कार मानते हुए बाबा ने एक छोटी सी मढ़िया बनवाकर शिवलिंग की विधिवत स्थापना कराई। तभी से यह स्थल ‘पातालेश्वर’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया। समय-समय पर यहां मंदिर का निर्माण और जीर्णोद्धार होता रहा, जिससे आज यह एक भव्य धार्मिक स्थल का रूप ले चुका है।
परिसर में स्थित है प्राचीन जलकुंड
मंदिर परिसर में एक प्राचीन जलकुंड भी स्थित है, जिसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बताया जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस पवित्र और पुण्यदायी है। इसके साथ ही परिसर में एक विशाल एवं प्राचीन पीपल का वृक्ष है, जिसकी शाखाओं में नीम और बड़ के वृक्ष भी जुड़े हुए हैं। यह अद्भुत प्राकृतिक संगम श्रद्धालुओं के लिए विशेष बना हुआ है।
वर्ष भर होते हैं धार्मिक आयोजन
महाशिवरात्रि पर पातालेश्वर धाम में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं। पूरा परिसर भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से भर जाता है। श्रावण मास में यहां विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान होते हैं। इसके अलावा वर्ष भर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहता है, जिससे यह धाम निरंतर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।



