
दुर्ग। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह चल रहा है, पुलिस और परिवहन विभाग यातायात नियमों का सख्ती से पालन करवा रहे हैं, लेकिन दुर्ग नगर निगम खुद ही नियमों की धज्जियां उड़ाता नजर आ रहा है। निगम की एक मालवाहक (गुड्स कैरियर) गाड़ी में 15 से अधिक सफाई कर्मचारियों को ठूंसकर दुर्ग से बालोद ले जाया जा रहा था। यह वाहन माल ढुलाई के लिए बना है, सवारियां ढोने के लिए नहीं, फिर भी निगम प्रशासन ने कर्मचारियों की सुरक्षा को ताक पर रखकर यह जोखिम भरा कदम उठाया।
गौरतलब है कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मालवाहक वाहनों में यात्रियों का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे वाहनों में सीट बेल्ट, हैंडल जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं होतीं, जिससे दुर्घटना की स्थिति में जान का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है। पड़ोसी जिले बालोद में तो पुलिस ने मालवाहक चालकों से शपथपत्र तक भरवाए हैं कि वे सवारियां नहीं ढोएंगे।
बताया जाता है कि दो दिन पहले ही दुर्ग पुलिस ने नियमों का उल्लंघन करने पर कुछ पुलिसकर्मियों का चालान काटा था, जिससे यातायात विभाग की सख्ती का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में नगर निगम का यह कृत्य न केवल लापरवाही बल्कि दोहरे मापदंड का भी उदाहरण है। सफाई कर्मचारी, जो शहर को स्वच्छ रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं, उनकी सुरक्षा के प्रति निगम की यह उदासीनता गंभीर सवाल खड़े करती है।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 (1 जनवरी से 31 जनवरी तक) के दौरान पूरे देश में जागरूकता अभियान चल रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी रायपुर, बिलासपुर समेत कई जिलों में बाइक रैली, नुक्कड़ नाटक और वाहन जांच जैसे कार्यक्रम हो रहे हैं। थीम “सीख से सुरक्षा, टेक्नोलॉजी से परिवर्तन” के तहत लोगों को ओवर स्पीडिंग, हेलमेट न पहनने और नशे में ड्राइविंग जैसे खतरों से आगाह किया जा रहा है।
नगर निगम प्रशासन से जब इस मामले में जवाब मांगा गया तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि निगम को सफाई कर्मचारियों के लिए उचित यात्री वाहन या बस की व्यवस्था करनी चाहिए, न कि जोखिम भरे तरीके अपनाने चाहिए।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सड़क सुरक्षा के नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या सरकारी संस्थान। यदि ऐसी लापरवाही जारी रही तो दुर्घटना की बड़ी घटना को न्योता मिल सकता है।



