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CG Ki Baat: नया बस्तर, नई जद्दोजहद! क्या अब बस्तरियों के रिवर्स माइग्रेशन पर ध्यान देगी कांग्रेस? देखिए पूरी रिपोर्ट

CG Ki Baat

रायपुर: CG Ki Baat इस वक्त बस्तर नई करवट ले रहा है। जहां दशकों बाद बंदूकें हारी हैं। लाल हिंसा अंतिम सांसें गिन रही है। इस माहौल में सत्तारूढ़ बीजेपी बस्तर में विजेता की मुद्रा में दिख रही है। ऐसे में विपक्ष अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। कांग्रेस एक बार फिर जनाधार बढ़ाने की कोशिश में है। इसके लिए कांग्रेस कभी बस्तर में यात्राएं निकाल रही है, तो कभी सरकार को कोस रही है, कभी संसाधनों के दोहन का डर दिखा रही है, तो कभी एंटी नक्सल अभियान में नुक्स निकालकर जनता के पक्ष में खड़े होने की कोशिश कर रही है। सवाल है..इन तमाम कवायदों का क्या कोई फायदा उन्हें होने वाला है या फिर कांग्रेस को नए प्लान बनाने की जरूरत है?

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छत्तीसगढ़ के बस्तर को नक्सलमुक्त करने मार्च 2026 तक मिली डेडलाइन का असर जमीन पर दिख रहा है। फोर्स के ताबड़तोड़ एंटी नक्सल ऑपरेशन्स और डबल इंजन की सरकार के तेज गति से विकास के संकल्प के चलते ये तय लगने लगा है कि जल्द ही बस्तर नक्समुक्त होगा। सवाल ये है कि उसके बाद क्या इसी सवाल ने विपक्षी दल कांग्रेस को भी एक्टिव कर दिया हैं। कांग्रेस ने अपना पूरा फोकस बस्तर में जमा लिया है। पीसीसी चीफ दीपक बैज बस्तर में एक के बाद एक न्याय यात्राएं निकाल रहे।

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इसके अलावा बैज ने किरंदुल से दंतेवाड़ा तक खनिज संसाधन बचाओ यात्रा शुरू की है, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे। दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने डबल इंजन सरकार में विकास ती तेज रफ्तार के दावे को खारिज करते हुए, बस्तर में बीजेपी सरकार कार्यकाल में बस्तर बड़ी संख्या में पलायन होने का आरोप लगाया। बघेल का आरोप है कि मौजूदा साय सरकार के शासनकाल में पिछले डेढ़ साल के कार्यकाल में 40 हजार से अधिक लोगों ने पलायन किया है, जबकि डॉ रमन सिंह के 15 साल के कार्यकाल में भी करीब 600 गांव से युवा गायब हो गए। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि डबल इंजन सरकार बस्तर के लोगों को रोजगार उपलब्ध नहीं कर पा रही है, आम लोगों की बात नहीं सुनी जा रही है इसलिए कांग्रेस को पदयात्रा करनी पड़ रही है ।

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इधऱ, कांग्रेस की न्याय और संविधान यात्रा पर भाजपा नेता तंज कसते हुए पलटवार किया कि ये सारी कवायद दीपक बैज और कांग्रेस की डूबती हुई नैया को बचाने के लिए है। पलायन के आरोप पर कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि पलायनवादी नेताओं को ही पलायन दिख रहा है ।

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कुल मिलाकर चिंता इस बात की है कि सालों से बस्तर में अशांति, नक्सल हिंसा और रुके विकास कार्यों का दौर गुजरता दिख रहा है। जाहिर है 2026 तक नक्सवाद पर पूर्ण विराम के बाद बीजेपी इसका पूरा श्रेय डबल इंजन सरकार को देगी। ऐसें में कांग्रेस ने अभी से बस्तर में अधूरे विकास, पलायन और आदिवासियों और ग्रामीणों के लिए न्याय जैसे विषयों पर बहस छेड़ दी है। सवाल है कांग्रेस की ये यात्राएं और बस्तर फोकस आमजन के असल संघर्ष के लिए है या फिर अपने नेता और पार्टी को बचाए रखने की बैचेनी है?

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