धनश्याम कौशिक पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष बिलासपुर : मोर गाँव मोर स्कूल कुरेलीl शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरेली, विकासखंड तखतपुर जिला बिलासपुर, विद्यालय का स्थानीय क्षेत्र का इतिहास

धनश्याम कौशिक पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष बिलासपुर : मोर गाँव मोर स्कूल कुरेलीl शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरेली, विकासखंड तखतपुर जिला बिलासपुर, विद्यालय का स्थानीय क्षेत्र का इतिहास
छत्तीसगढ़ बिलासपुर भूपेंद्र साहू ब्यूरो रिपोर्ट/ शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरेली, विकासखंड तखतपुर जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़
मोर गाँव – मोर स्कूल : विद्यालय एवं स्थानीय क्षेत्र का इतिहास
प्रस्तुतकर्ता – प्रधान अध्यापक कृष्णा नंद चौबे नोडल शिक्षक गौरीशंकर कौशिक संकुल शैक्षिक समन्वयक – गेंदा प्रसाद उपाध्याय
विशेष सहयोग -शिक्षकगण – ललित राजपूत, रामचरण कौशिक, रामेश्वर श्रीवास, धर्मेन्द्र खरे, दीपक मिश्रा, श्रीमती शिवरंजनी साहू.
विद्यालय समूह- ईशा कौशिक ( कक्षा 8 वी ),संध्या कौशिक (कक्षा 8 वी ), रीचा कौशिक, दिशा ध्रुवे ,समा मिरी
- सामान्य जानकारी विद्यालय का नाम – शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरेली, गांव का नाम: कुरेली, विकास खंड : तखतपुर, जिला : बिलासपुर 2. स्थानीय क्षेत्र का संक्षिप्त परिचय जन संख्या : 2000 लगभग, महिला: 1150 , पुरुष: 950, साक्षरता दर: 97% (महिला 92%, पुरुष:96%), क्षेत्रफल : 800 हेक्टेयर, प्रमुख भाषा :छत्तीसगढ़ी , हिंदी, रहन- सहन : कृषि प्रधान
3 गांव एवं स्कूल का इतिहास
ग्राम कुरेली घोंघा नदी के तटपर स्थित है | ग्राम के एक बुजुर्ग पुनदास टंडन जी बताते हैं कि यह गांव आज से लगभग 300 से 350 वर्ष पूर्व बसाया गया ।गांव बसाने वालों में उनके पूर्वज भी थे । गांव के उत्तर में सागर , दक्षिण मे खजुरी , पूर्व में सकर्रा तथा पश्चिम में ठाकुरकापा केकराड़ ग्राम स्थित है |
स्कूल का इतिहास –
यह विद्यालय 01/09/1978 में स्थापित हुआ | यहाँ उस समय आसपास के 8 गांव के छात्र पढ़ने आते थे | गांव के बुजुर्ग मोतीदास मानिकपुरी बताते हैं ,कि ग्राम के गौटिया फेकू लाल कौशिक के प्रयासों से यह स्कूल स्थापित हुआ और शाला संचालन के लिए रु.5000 दिए |गांव वालों ने जन सहयोग से स्कूल की छत के लिए इमारती लकड़ी दिए |
संस्कृति-
यह गाँव कृषि प्रधान गांव है |यहाँ पिछड़ा वर्ग , अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति समुदाय के लोग रहते हैं | सभी त्यौहार साथ मिलकर मानते हैं | दिवाली के अवसर पर गौरा- गौरी उत्सव में पूरा गाँव सम्मिलित होता है | माघ पूर्णिमा के अवसर पर पड़ोसी गाँव सागर में मेला लगता है |
गांव के रीति रिवाज मान्यताएं
दानों बाबा वृक्ष (प्रकृति )पूजा
गांव वाले एक सेमल वृक्ष को दानों बाबा के रूप में पूजा करते है। दानों बाबा यहां के प्रमुख ग्राम देवता है। लोग दूर-दूर से अन्य गांव से यहां अपनी मन्नत मांगने आते हैं। ऐसी मान्यता है कि मवेशी या कीमती वस्तु के खो जाने पर लोग यहां पूजन अर्चन करते हैं जिससे जल्द ही खोया सामान मिल जाता है ।लोगों की मान्यता है कि दानों बाबा गांव में संकट आने से पूर्व लोगों को किसी न किसी माध्यम से सचेत करते है और रक्षा करते हैं।
ग्राम के त्यौहार , उत्सव आयोजनों में सबसे पहले दानों बाबा का पूजन किया जाता है।
दानों बाबा की मान्यता भी रोचक हैं, बहुत पहले घोंघा नदी में बाढ़ आया था और उसमें एक छोटी टूटी डोंगा (नाव ) बहते बहते इस स्थान पर किनारे लगा और उसी स्थान पर सेमल का पौधा उग आया।
आज जहां एक और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है जंगलों की सफाई किया जा रहा है वहीं इस गांव के लोग वृक्ष की पूजा करते हैं । दानव बाबा ग्राम देवता के रूप में सेमल वृक्ष की देखरेख गांव वालों की प्रकृति प्रेम का परिचायक है ।
दयाल सागर ( बाउली) दयाल सागर एक छोटा सा तालाब है,जो गांव के स्कूल के निकट ही स्थित है। इस तालाब की अपनी एक विशिष्ट महत्व है ।ऐसी मान्यता है कि तालाब में सच्चे मन से डुबकी लगाने वाले के शरीर से कई चर्म रोग जैसे दाद,खाज, खुजली फोड़े ,फुंसी दूर हो जाते हैं । लोग दूर-दूर से इस तालाब में स्नान करने आते हैं और चर्म रोग से निजात पाते हैं ।गांव वाले बताते हैं कि तालाब के निर्माण में जमीदार (गौटिया – गोटनिन )ने मजदूरों को अपने हाथों से धान साफ करके मजदूरी दिए थे । वे नहीं चाहते थे, कि इस पुण्य काम में मजदूरों को एक भी धान का खाली दाना या कंकड़ मिले।
सिद्ध मुनि ( ग्राम देवता) गांव की जीवन रेखा कहीं जाने वाली घोंघा नदी के किनारे सिद्ध मुनि का एक छोटा सा मंदिर है जो मनोकामना पूरी करने के लिए प्रसिद्ध है। गांव के लोग बताते हैं कि पहले इस जगह में एक सिद्ध ऋषि तप करते थे |अपने तप से उसने सिद्धियां अर्जित कर ली थी |फिर एक दिन अचानक से गायब हो गए ।लोगों ने वहां जाकर देखा तो उनके स्थान पर एक आदमकद का पत्थर था। बाद में लोगों ने यहां छोटा सा मंदिर बनाकर इस प्रतिमा की पूजा करने लगे। आज यहां सामुदायिक सहभागिता से वृक्षारोपण कर एक सुंदर बगिया बना दिया गया है । नवरात्रि में यहां मनोकामना ज्योति कलश स्थापित की जाती है।
राजनीतिक विवरण -यह ग्राम बिलासपुर लोकसभा संसदीय क्षेत्र के तखतपुर विधान सभा में स्थित हैं | यहाँ लगभग 1400 मतदाता है | यहाँ के निवासी घनश्याम कौशिक पूर्व में बिलासपुर जिला पंचायत के उपाध्यक्ष रह चुके हैं |
4 गाँव के नामकरण का कारण
इस गांव का नाम कुरेली क्यों पड़ा ? इसके पीछे कई मान्यताएं हैं ।एक मान्यता यह है कि इस गांव के आसपास घोंघा नदी किनरे जंगल हुआ करता था ,जिसमें कई प्रजातियों के पशु पक्षी विचरण करते थे।एक पक्षी की आवाज पूरे गांव में दिन भर गूंजा करती थी ।उस पक्षी का स्थानीय नाम सुरैली था । इसी पक्षी के नाम पर इस गांव नाम सुरैली हुआ होगा जो कालांतर में सुरेली से कुरेली नाम हो गया। दूसरी मान्यता है कि ब्रिटिश शासन काल में इस गाँव की जमींदारी कुर्मी जाति के जमींदार को दिया गया इसलिए कुर्मी से कुरेली नाम पड़ा ।
5 साक्षरता दर / साक्षरता दर: 97% (महिला 92%, पुरुष:96%)
कुरेली गाँव में महिलाओं की स्थिति सम्मान जनक एवं सुदृढ़ है | इस गाँव में स्त्री – पुरुष अनुपात बहुत अच्छा है | ग्राम में 1150 महिला और 950 पुरुष है | महिलाएं कृषि कार्य , किराना दुकान, महिला स्व.सहायता समूह के माध्यम से मछली पालन आदि का कार्य बखूबी ढंग से करती हैं। पंचायत में महिलाओं की प्रतिनिधित्व सराहनीय है | चार पंचवर्षीय इस गाँव में सरपंच के रूप में महिला ने ही प्रतिनिधित्व किया है | वर्तमान में विद्यालय की शाळा प्रबंध समिति की अध्यक्ष एक महिला ही है
6.स्वास्थ्य संसाधन / इस ग्राम में स्वास्थ्य केंद्र तो नहीं हैं, परन्तु पड़ोस के गाँव सागर में उपस्वास्थ्य केंद्र और खजुरी में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र हैं जहाँ जाकर चिकित्सा लाभ लेते हैं | गावं में एक पशु औषधालय है| आँगनबाड़ी में प्रति मंगलवार को स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा गर्भवती माता को टीका लगाया जाता है | ग्राम में मितानिन के द्वारा स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी दी जाती है |
- आवागमन के संसाधनों की स्थिति / कुरेली गांव बिलासपुर मुंगेली राष्ट्रीय राजमार्ग से 10 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है ।जिला मुख्यालय बिलासपुर से 25 किलोमीटर एवं ब्लॉक मुख्यालय तखतपुर से 23 किलोमीटर दूरी पर यह गांव स्थित है ।नजदीकी रेलवे स्टेशन उसलापुर से मात्र 18 किलोमीटर तथा बिलासपुर रेलवे स्टेशन से 27 किलोमीटर की दूरी पर है | गावं में बारहमासी रोड है| यहाँ के निवासी आवागमन के लिए स्वयं के मोटर वाहन से यात्रा करते हैं | ऑटो रिक्शा एकमात्र आवागमन के सार्वजनिक साधन है|
- गाँव से जुडी ऐतिहासिक घटना/ ग्राम के बुजुर्ग पुनदास टंडन बताते है की स्वतंत्रता आन्दोलन के समय गांव के गौटिया स्व. श्री फेकू लाल कौशिक और पंडित सुन्दर लाल शर्मा के सभी जाति, वर्गों के मंदिर प्रवेश की मुहिम में भाग लेने जाया करते थे ।उनके संदेशों को अपने लीला मंडली में मंचन किया करते थे | तत्कालीन राजघराने करगी(कोटा) में उनके लीला को अंग्रेज अफसर देखने आये थे |
9 . विद्यालय की उपलब्धियां
1 समाज सेवी एवं कला ,संस्कृति के उपासक स्वर्गीय फेकू लाल कौशिक बड़े गोटिया
स्व. फेकू लाल कौशिक बड़े गौटिया यहां की जमींदार थे ,जो संस्कृति एवं कला की उपासक थे। फेकू लाल जीवन पर्यंत गांव के लोगों की सेवा, सहायता की । उनका सारा जीवन संस्कृति एवं समाज को समर्पित रहा ।उस दौर में उन्होंने कृष्ण लीला मंडली का गठन कर गांव-गांव घूम कर इसका मंचन किया करते थे| वह एक सफल संचालक थे |कई जिलों राजनांदगांव ,दुर्ग में भी जाकर कृष्ण लीला का प्रदर्शन किया करते थे | उनके लीला को देखने तत्कालीन ब्रिटिश अफसर भी आया करते थे।
2 घनश्याम कौशिक महिला सशक्तिकरण के सिपाही घनश्याम कौशिक गावं में पले , बढ़े और जिला पंचायत बिलासपुर के उपाध्यक्ष पद को सुशोभित किया |घनश्याम कौशिक विगत कई वर्षों से गाँव तथा पूरे अंचल में महिला को जागरुक कर, संगठित कर उनके शसक्तीकरण के लिए कार्य कर रहे हैं | - स्व.पुन दास टंडन – प्रसिद्ध वैद्य एवं समाजसेवी , सतनामी संस्कृति के पोषक
- परमानन्द कौशिक – नायब तहसीलदार
5 राधेश्याम धुर्वे – शाखा प्रबंधक (PNB) - नंदराम बंजारे – व्याख्याता ( से,नि,)
7 ईश्वरप्रसाद सत्यपाल – भारतीय सेना में अधिकारी
8, मेजर बर्मन – BSF में सेवारत
9, दुर्गेश खुसरो – भारतीय सेना , ऑपरेशन सिन्दूर में शामिल


