छत्तीसगढ़

बच्चो को परीक्षा के तनाव और अवसाद से बचाने हेतु अभिभावक की भूमिका निभाये अधीक्षक

कोण्डागांव । एक छात्रावास अधीक्षक या अधीक्षिका पर बच्चों के भविष्य को संवारने का महान दायित्व रहता है, अतः हर अधीक्षक न केवल बच्चो को पढ़ाई के लिए प्रेरित करे बल्कि उनकी मानसिक समस्याओं को समझ कर उनके निदान भी करे। चूंकि अभी बोर्ड परीक्षाऐं प्रारंभ होने को है अतः यह जरुरी है कि इन परीक्षाओं के प्रति बच्चों में भय-डर को मिटाकर उन्हें परीक्षाओं को लेकर सकारात्मक बनाया जाए। इस संबंध में बच्चो की मनः स्थिति को समझना सदा जरुरी है, इसके लिए सभी अधीक्षक को व्यक्तिगत रुचि लेकर छात्रों के बीच स्वंय पहल करनी होगी।

दिनांक 20 फरवरी को जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आश्रम-छात्रावास अधीक्षक-अधीक्षिकाओं की बैठक में जिला कलेक्टर नीलकंठ टीकाम ने उक्त आशय के विचार प्रगट किए। बैठक में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जी.एस.सोरी सहित जिले में पदस्थ मंडल संयोजक और आश्रम-छात्रावासों के अधीक्षक एवं अधीक्षिकाएं मौजूद थे।

जिला कलेक्टर ने इस क्रम में आगे कहा कि हमें छात्रों को यह समझाना होगा कि परीक्षाऐं ही जीवन का आखिरी मूल्यांकन नहीं होती, रास्ते और भी होते है। इसके अलावा हर पालक को यह जानना आवश्यक है कि बच्चों के व्यक्तित्व को सिर्फ अंकसूची से नहीं आंका जा सकता। हर अधीक्षक-अधीक्षिका यह चुनौती स्वीकार करनी चाहिए कि छात्रावास में उनकी पदस्थापना मात्र नौकरी के उद्देश्य से नहीं है बल्कि वे एक भविष्य के निर्माण करने जा रहे है। इस दौरान उन्होंने छात्रावास अधीक्षको को छात्रावास में ही निवास करने के अलावा अपने व्यक्तिगत आचरण के प्रति सचेत रहने की नसीहत दी। इसके साथ ही उन्होंने छात्रावास में बच्चों को पोष्टिक भोजन, मीनू के अनुसार नास्ता उपलब्ध कराने, छात्रावासो में पेयजल, बिजली व्यवस्था, साफ-सफाई, शौचालयो की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश आदिवासी विभाग के अधिकारियों को दिए। समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने अधीक्षको से हाॅस्टल की समस्याओं की भी जानकारी चाही। जिसमें छात्रावास चिंगनार में माह का राशन नहीं आने, छात्रावास मैनपुर और माकड़ी में जलआपूर्ति में हो रही दिक्कत से अवगत कराया गया। जिसके लिए उन्होंने ने तत्काल निराकरण करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।  

सबका संदेस ब्यूरो, कोंडागांव 9425598008

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