देश दुनिया

पानी का दुरूपयोग रोकने मोटर पंप में लगेगा आटोमेटिक ऑन-ऑफ सिस्टम

पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाने शासन ने करोड़ों रुपए खर्च कर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया है। बावजूद इसके, कई वार्डों में पानी की किल्लत खत्म नहीं हो रही। विशेषकर गर्मियों में स्लम इलाकों में पानी के लिए महिलाओं को मशक्कत करनी पड़ती है।

इस समस्या के समाधान के लिए महापौर, प्रभारी कमिश्नर ने बैठक आयोजित की, जहां 2 घंटे तक इस विषय पर चर्चा हुई। बैठक में पानी का अनावश्यक उपयोग रोकने के उद्देश्य से मोटर पंपों में ऑटोमेटिक सिस्टम लगाने का निर्णय लिया गया, ताकि तय समय पर पंप स्वत: चालू और बंद हो सके। शनिवार को नगर निगम में जलसंकट से निपटने को लेकर रणनीति तैयार की गई। महापौर रामू रोहरा ने निर्देश दिया कि गर्मी के दिनों में सबसे अधिक पानी की आवश्यकता वाले क्षेत्रों पर सर्वे किया जाए और उन्हें चिन्हित कर विशेष कार्ययोजना बनाई जाए।

शहर की करीब 18 हजार नलों में पानी सप्लाई करता है। इसके बावजूद 40 वार्डों में लगभग 120 मोटर पंपों से भी पेयजल की आपूर्ति की जाती है। लोग न केवल पीने के लिए बल्कि बर्तन और कपड़े धोने जैसी जरूरतों के लिए भी मोटर पंप का उपयोग करते हैं, जिससे हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। पानी बचाने के इस प्रयास के तहत पहले पॉश कालोनियों में मोटर पंपों को ऑटोमेटिक सिस्टम से जोड़ा जाएगा। चरणबद्ध तरीके से स्लम बस्तियों में यह काम किया जाएगा। इसका नतीजा यह होगा कि पानी की बचत के साथ-साथ बिजली के बिल में भी कमी आएगी।

वहीं दूसरी ओर शाम को मकई चौक के पास पाइपलाइन लीक होने से हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह गया। यहां निगम द्वारा पुराने इंटरकनेक्शन को बंद करने का काम चल रहा था, जिसके कारण लीकेज हो गया।

Related Articles

Back to top button