कर्ज लेने वालों को तीन महीने के ब्याज की छूट से जमाकर्ताओं को होगा नुकसान: उदय कोटक – Uday Kotak says, after EMI interest exemption to loan takers of 3 months would hit interest of Deositors | business – News in Hindi
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सीआईआई के अध्यक्ष उदय कोटक ने कहा कि जमाकर्ताओं के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए.
उद्योग संगठन सीआईआई (CII) के अध्यक्ष उदय कोटक (Uday Kotak) ने कहा कि कर्ज लेने वालों को कोरोना वायरस के दौरान वित्तीय दबाव से मुक्त रखने के लिए तीन महीने तक किस्त (EMI) नहीं चुकाने की छूट दी गई थी. अब अगर उन्हें इस दौरान का ब्याज (Interest) भी नहीं चुकाने की छूट दी गई तो जमाकर्ताओं (Depositors) के हित प्रभावित होंगे.
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कोटक महिंद्रा बैंक के प्रमोटर उदय कोटक ने कहा कि लोगों के जमा धन से ही दूसरे लोगों को लोन दिया जाता है. कर्ज पर ब्याज से होने वाली आय को ब्याज के तौर पर जमा करने वालों को दे दिया जाता है. उन्होंने कहा कि बैंकिंग नियमन कानून को जमा करने वालों के हितों की रक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. ऐसे में हमें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जो उनके जमा को जोखिम में डाले. सुप्रीम कोर्ट अभी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 27 मार्च के दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार कर रहा है.
ये भी पढ़ें-कोरोना की दवा बनाने वाली इन दो कंपनियों का होगा विलय! AstraZeneca और Gilead में शुरू हुई बातसुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कर्ज की किस्तों को चुकाने पर दी गई तीन महीने की छूट के दौरान लोन लेने वालों का ब्याज माफ करने का अनुरोध किया गया है. इस संबंध में 4 जून को कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में आरबीआई ने कहा था कि किस्त चुकाने पर अस्थायी रोक का मकसद कोरोना संकट से परेशान लोगों को फायदा पहुंचाना है. इससे उन पर वित्तीय दबाव कम करने की कोशिश की गई है. इसका मकसद उनके भुगतान पर किसी तरह की छूट देना बिलकुल नहीं है.
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उदय कोटक ने कहा, ‘रिजर्व बैंक ने अपना पक्ष रखा और मैं इसका समर्थन करता हूं.’ उन्होंने कहा कि अगर रोक की अवधि के लिए ब्याज का भुगतान नहीं किया जाएगा तो बैंकों को जमाकर्ताओं को ब्याज का भुगतान करने में परेशानी होगी. इस बीच, शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस संबंध में 12 जून तक सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने को कहा है. उदय कोटक ने कहा कि उनका नीति निर्माताओं से अनुरोध है कि वे कोई भी फैसला विवेकपूर्ण तरीके से लें. उनका मानना है कि सरकार और रिजर्व बैंक को सुप्रीम कोर्ट में अपना बचाव मजबूती के साथ करना चाहिए.
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First published: June 7, 2020, 10:26 PM IST