छत्तीसगढ़

झीरम घाटी कांड में 13 साल बाद बड़ा फैसला, NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा

झीरम घाटी कांड को समझने के लिए घटना, मारे गए लोग, जांच, न्यायिक आयोग और अदालत की कार्रवाई को अलग-अलग देखना जरूरी है। नीचे उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड और हाल की जानकारी के आधार पर पूरी तस्वीर है। ।सबका संदेश न्यूज।।

  1. 25 मई 2013 को क्या हुआ?

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला बस्तर के दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था। शाम करीब 4:15 बजे CPI (माओवादी) के सदस्यों ने काफिले पर हमला किया। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस हमले में 27 लोगों की मौत और 38 लोग घायल हुए।

यह हमला इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि काफिले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

  1. कौन-कौन से प्रमुख नेता मारे गए?

हमले में प्रमुख रूप से:

नंद कुमार पटेल — उस समय छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष

महेंद्र कर्मा — कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री

विद्याचरण शुक्ल — पूर्व केंद्रीय मंत्री, जो गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मृत्यु हुई

समेत कांग्रेस के कई नेता, कार्यकर्ता और सुरक्षा कर्मी मारे गए। उस समय की रिपोर्टों में कुल मृतकों की संख्या 29 भी बताई गई है, जबकि NIA के अपने मामले के रिकॉर्ड में 27 मृतक दर्ज हैं। यह अंतर अलग-अलग रिकॉर्ड में मृत्यु की गणना/घटना के समय और बाद की मौतों को शामिल करने के तरीके से जुड़ा है।

  1. NIA ने जांच कब संभाली?

हमले के दो दिन बाद, 27 मई 2013 को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के आदेश के बाद NIA ने दरभा थाने की FIR को अपने कब्जे में लेकर अपनी जांच शुरू की।

NIA ने मामले को RC-06/2013/NIA/DLI के रूप में दर्ज किया। इसमें हत्या, हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश सहित कई धाराएं लगाई गईं।

  1. NIA की चार्जशीट

NIA के रिकॉर्ड के मुताबिक:

25 सितंबर 2014 — 9 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई।

28 सितंबर 2015 — 30 आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की गई।

कुछ आरोपी फरार थे और उनके संबंध में आगे जांच जारी रखी गई।

  1. झीरम आयोग क्यों बनाया गया?

NIA की आपराधिक जांच के साथ-साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग बनाया।

पूर्व छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाले आयोग ने लंबे समय तक गवाहों और दस्तावेजों की जांच की।

आयोग ने नवंबर 2021 में राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट 10 खंडों और 4,184 पन्नों की थी।

  1. आयोग की रिपोर्ट को लेकर विवाद क्या था?

रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद यह राजनीतिक विवाद उठा कि रिपोर्ट को विधानसभा में किस तरह और कब रखा जाए तथा क्या रिपोर्ट के निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

इसके बाद राज्य सरकार द्वारा एक नया जांच आयोग गठित किए जाने को लेकर भी कानूनी विवाद हुआ और उस आयोग की कार्यवाही को चुनौती दी गई।

इसलिए झीरम मामला केवल नक्सली हमले की आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा; इसमें हमले की सुरक्षा व्यवस्था, परिस्थितियों और राजनीतिक पक्षों से जुड़े सवालों को लेकर भी लंबे समय तक विवाद रहा।

  1. 2026 में अदालत की बड़ी कार्रवाई

इस मामले में एक महत्वपूर्ण हालिया घटनाक्रम 5 सितंबर 2026 का है। NIA के अनुसार NIA विशेष अदालत, जगदलपुर ने झीरम घाटी हमले में शामिल CPI (माओवादी) के 10 आरोपी कैडरों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई।

यह 2013 की घटना के बाद लगभग 13 साल से अधिक समय में हुई महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई है।

  1. एक जरूरी अंतर

झीरम मामले में दो अलग-अलग चीजों को मिलाकर नहीं देखना चाहिए:

NIA की जांच/अदालती मामला
→ किसने हमला किया, किन लोगों पर आपराधिक आरोप हैं और उनकी कानूनी जिम्मेदारी क्या है।

न्यायिक आयोग
→ हमले की परिस्थितियां, सुरक्षा व्यवस्था और घटना से जुड़े व्यापक सवालों की जांच।

इसलिए किसी आयोग की रिपोर्ट में किसी तथ्य या सवाल का उल्लेख होना अपने-आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक दोषसिद्धि नहीं होता। दोषसिद्धि अदालत के निर्णय से होती है।

संक्षेप में पूरी टाइमलाइन

25 मई 2013 → झीरम घाटी में कांग्रेस परिवर्तन यात्रा पर नक्सली हमला।
27 मई 2013 → NIA ने जांच संभाली।
25 सितंबर 2014 → पहली NIA चार्जशीट।
28 सितंबर 2015 → पूरक चार्जशीट।
2021 → न्यायिक आयोग ने 4,184 पन्नों की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी।
5 सितंबर 2026 → NIA विशेष अदालत, जगदलपुर ने 10 CPI (माओवादी) आरोपियों को सजा सुनाई।

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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