दो जिलों में दो कानून?भारतीय जनता पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल – कोरिया में दागियों पर सख्ती, सूरजपुर में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले को मीडिया प्रभारी बनाने से बवाल

दो जिलों में दो कानून?भारतीय जनता पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल – कोरिया में दागियों पर सख्ती, सूरजपुर में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले को मीडिया प्रभारी बनाने से बवाल
कोरिया/सूरजपुर, छत्तीसगढ़।
स्वच्छ राजनीति और अनुशासन की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब अपने ही फैसलों के कारण सवालों के घेरे में है। एक ही प्रदेश के दो जिलों में संगठन की अलग-अलग नीति ने कार्यकर्ताओं और जनता को हैरान कर दिया है। जहां कोरिया जिले में अपराध दर्ज होते ही पदाधिकारियों को तत्काल हटाया जा रहा है, वहीं सूरजपुर जिले में गंभीर आपराधिक प्रकरण का सामना कर रहे व्यक्ति को जिम्मेदार पद सौंप दिया गया।
इस दोहरे रवैये ने संगठन के भीतर असंतोष और बाहर आलोचना को जन्म दे दिया है।
कोरिया: ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
कोरिया जिले में भाजपा नेतृत्व ने साफ संदेश दिया है कि संगठन में केवल स्वच्छ छवि वाले लोगों को ही स्थान मिलेगा।
जानकारी के अनुसार, जिले में दो पदाधिकारियों पर अपराध दर्ज होते ही बिना किसी देरी के उन्हें पद से मुक्त कर दिया गया। मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद संगठन ने अनुशासन को प्राथमिकता दी।
स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसी सख्ती की वजह से जनता के बीच पार्टी की छवि मजबूत बनी हुई है।
सूरजपुर: विवादित नियुक्ति से मचा हड़कंप
इसके उलट सूरजपुर जिले के भैयाथान मंडल में किसान मोर्चा के मीडिया प्रभारी पद पर निखिलेश नारायण पाण्डेय की नियुक्ति ने विवाद खड़ा कर दिया है।
आरोप है कि नियुक्ति से पहले न तो चरित्र सत्यापन किया गया और न ही उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जांच की गई।
क्या है मामला?
सूत्रों के अनुसार:
चिरमिरी थाना में अपराध क्रमांक 340/2020 दर्ज
धारा 420 और 34 के तहत धोखाधड़ी का मामला
नौकरी लगाने के नाम पर लगभग 6 लाख रुपये व 50 हजार के आभूषण की ठगी का आरोप
लंबे समय तक फरार रहने के बाद गिरफ्तारी
कई महीनों तक जेल में रहने के बाद जमानत
मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन (एविडेंस स्टेज)
इन तथ्यों के बावजूद जिम्मेदारी सौंपे जाने से संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
मीडिया क्षेत्र में भी सवाल
बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति पूर्व में एक निजी न्यूज चैनल से भी चरित्र प्रमाण प्रस्तुत न कर पाने के कारण हटाया जा चुका है।
साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पंजीकृत कार्ड के कथित दुरुपयोग को लेकर कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत भी दर्ज कराई गई है।
अब उठ रहे तीखे सवाल
स्थानीय कार्यकर्ताओं के सवाल
क्या संगठन में नियुक्ति से पहले पृष्ठभूमि की जांच नहीं होती?
ईमानदार कार्यकर्ताओं की अनदेखी क्यों?
क्या नियम सिर्फ कुछ जिलों के लिए हैं?
संगठन के भीतर सवाल
कोरिया में सख्ती और सूरजपुर में ढील क्यों?
क्या जिला नेतृत्व ने तथ्य छुपाए?
क्या प्रदेश स्तर से जांच होगी?
मीडिया के सवाल
क्या पार्टी दागी चेहरों को संरक्षण दे रही है?
क्या “स्वच्छ राजनीति” सिर्फ नारा बनकर रह गया है?
क्या इससे संगठन की साख प्रभावित नहीं होगी?
संगठन की चुप्पी
मामला किसान मोर्चा के जिला और प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच चुका है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
हालांकि, अंदरखाने से नियुक्ति रद्द करने और निष्कासन की मांग तेज बताई जा रही है।
निष्कर्ष
एक ही पार्टी, एक ही प्रदेश, लेकिन नियम अलग-अलग — यही विरोधाभास अब भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है।
यदि संगठन सच में स्वच्छ छवि की राजनीति करना चाहता है, तो हर जिले में समान मापदंड लागू करना अनिवार्य होगा।
वरना सवाल उठते रहेंगे — क्या पार्टी में सच में अनुशासन है या सिर्फ दिखावा?
