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सात नई रेल लाइनें दक्षिण भारत जाने वालों का सफर करेंगी आसान

इनमें होरनूर–मैंगलुरु तृतीय एवं चतुर्थ लाइन (307 किमी), कोयंबटूर–शोरनूर तृतीय और चतुर्थ लाइन (99 किमी), शोरनूर–एर्नाकुलम तृतीय लाइन (106 किमी), एर्नाकुलम–कायंकुलम (कोट्टायम मार्ग से) तृतीय लाइन (115 किमी), कायंकुलम–तिरुवनंतपुरम तृतीय लाइन (105 किमी), तिरुवनंतपुरम–नागरकोइल तृतीय लाइन (71 किमी) तथा तुरवूर–अंबलप्पुझा दोहरीकरण (46 किमी) शामिल हैं. ये परियोजनाएं केरल के रेल नेटवर्क को मजबूत बनाने, ट्रेनों की गति बढ़ाने, यात्रा समय कम करने और राज्य के पर्यटन व व्यापार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. डीपीआर तैयार होने के बाद राज्य सरकार, नीति आयोग और वित्त मंत्रालय से परामर्श कर आगे की मंजूरी ली जाएगीरेल मंत्रालय ने कहा कि ये परियोजनाओं के पूरे होने का सटीक समय-सीमा अभी तय नहीं की जा सकता है. देश में पिछले 11 सालों में 130 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की गति वाली ट्रैक की लंबाई लगभग 4 गुना बढ़ी है. 2014 में यह 5,036 किमी थी, जो अब 23,477 किमी हो गई है. यह कुल रेल नेटवर्क का 22.2% है.
आधुनिक रेल, मशीनीकृत रखरखाव, उन्नत ट्रैक निगरानी, स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग और पूर्ण ट्रैक सर्किटिंग से गति और सुरक्षा में सुधार हुआ है.केरल सरकार अपनी ओर से सिल्वर लाइन (तिरुवनंतपुरम-कासरगोड) सेमी-हाई स्पीड प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. यह केरल रेल विकास निगम लिमिटेड (केआरडीसीएल) द्वारा तैयार की गई है, जो राज्य और रेल मंत्रालय की संयुक्त कंपनी है. रेल मंत्रालय ने सलाह दी है कि डीपीआर को ब्रॉड गेज, कवच सिस्टम, 2×25 केवी विद्युतीकरण और पर्यावरण सुरक्षा के साथ संशोधित किया जाए. लेकिन राज्य सरकार इसे स्टैंड-अलोन प्रोजेक्ट मानने पर जोर दे रही है.

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