मुख्तार अंसारी के बेटों अब्बास और उमर को हाईकोर्ट से राहत, गजल होटल केस के ट्रायल पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर के बहुचर्चित गजल होटल मामले में अब्बास अंसारी और उमर अंसारी के खिलाफ चल रही अदालती कार्यवाही को फिलहाल थाम दिया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में जारी मुकदमे की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से इस मामले में जवाब तलब किया है। यह आदेश अंसारी बंधुओं द्वारा दायर उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे पूरे मुकदमे को ही निरस्त करने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया अंतिम मौका
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि राज्य सरकार की ओर से अब तक विस्तृत जवाब दाखिल नहीं किया जा सका है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए ‘अंतिम अवसर’ प्रदान किया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 फरवरी की तिथि नियत की है और स्पष्ट किया है कि तब तक ट्रायल कोर्ट में इस मामले से जुड़ी कोई भी कार्यवाही नहीं होगी।
गाजीपुर के कोतवाली थाने में 19 सितंबर 2020 को इस मामले को लेकर एफआईआर दर्ज की गई थी। इस केस में मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शां अंसारी, उनके विधायक बेटे अब्बास अंसारी, छोटे बेटे उमर अंसारी सहित कुल 12 लोगों को नामजद किया गया था। आरोप है कि गजल होटल के निर्माण के लिए जमीन का जो बैनामा (Sale Deed) कराया गया था, वह पूरी तरह फर्जी था। प्रशासन का दावा है कि सरकारी और अन्य लोगों की जमीनों पर धोखाधड़ी के जरिए कब्जा कर इस आलीशान होटल का निर्माण कराया गया था।
नक्शा और निर्माण पर पहले ही चल चुका है बुलडोजर
आपको बता दें कि गजल होटल प्रशासन के निशाने पर लंबे समय से रहा है। जिला प्रशासन ने इस होटल के नक्शे को अवैध बताते हुए साल 2020 में ही इसके ऊपरी हिस्से पर बुलडोजर चलवा दिया था। तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर होटल के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया था। तभी से यह मामला दीवानी और फौजदारी दोनों स्तरों पर कानूनी लड़ाई का केंद्र बना हुआ है।
सीजेएम कोर्ट की कार्यवाही को दी गई चुनौती
वर्तमान में इस मामले की सुनवाई गाजीपुर की सीजेएम (CJM) कोर्ट में चल रही है। अब्बास और उमर अंसारी ने अपनी याचिका में दलील दी है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और राजनीतिक द्वेष के चलते उन्हें इस मामले में घसीटा गया है। याचिका में मांग की गई है कि चार्जशीट और ट्रायल कोर्ट के संज्ञान आदेश को पूरी तरह रद्द किया जाए।अब सबकी नजरें 24 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ राज्य सरकार को यह साबित करना होगा कि उनके पास अंसारी बंधुओं के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। फिलहाल, हाईकोर्ट के इस स्थगन आदेश (Stay Order) से अब्बास और उमर अंसारी को तात्कालिक तौर पर जेल और कोर्ट-कचहरी की लंबी प्रक्रिया से राहत मिल गई है।



