चने की बंपर पैदावार चाहिए तो बुवाई के 30 दिन बाद ये 3 गलती न करें किसान, वरना खेत में सड़ेगी फसल

एमपी के खरगोन में रबी सीजन के दौरान चने की खेती का रकबा तेजी से बढ़ रहा है. अच्छी कीमत और कम लागत के कारण अब किसान गेहूं के साथ-साथ चना भी बड़े पैमाने पर बोने लगे हैं. चना ऐसी फसल मानी जाती है, जो कम पानी और कम खर्च में अच्छा मुनाफा देती है. लेकिन, कई बार सही जानकारी के अभाव में किसान कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे मेहनत के बावजूद उत्पादन कम हो जाता है. खासकर बुवाई के 30 दिन बाद सिंचाई को लेकर की गई लापरवाही किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है, जिन किसानों ने खेतों में चना लगाया है, उन्हें बुवाई के बाद 3 खास बातों का ध्यान रखना चाहिए. ये बातें सिंचाई से जुड़ी हैं.
सिंचाई के समय न करें ये काम
विशेषज्ञों का कहना है कि चने की फसल में जरूरत से ज्यादा पानी सबसे बड़ा दुश्मन है. कई बार किसान यह सोचकर जल्दी-जल्दी सिंचाई कर देते हैं कि फसल तेजी से बढ़ेगी, लेकिन इसका असर उल्टा पड़ता है. खरगोन में चने की खेती बढ़ने की एक बड़ी वजह यह भी है कि गेहूं और मक्का की तुलना में इसमें सिंचाई और खाद का खर्च कम आता है. यही कारण है कि किसान इसे फायदे का सौदा मान रहे हैं. हालांकि, जरूरत से ज्यादा पानी देने पर पौधे पीले पड़ने लगते हैं और बाद में सड़ भी सकते हैं. इससे पूरी फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है.
किसानों की सबसे बड़ी गलती
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी बताते हैं कि चना ऐसी फसल है, जिसे बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती. कम पानी में भी यह अच्छा उत्पादन देती है. लेकिन, कई किसान आदत के अनुसार गेहूं की तरह बार-बार सिंचाई कर देते हैं. यही सबसे बड़ी गलती है. ज्यादा पानी मिलने से चने की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और पौधों में रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है. चूंकि, चने की फसल में गेहूं की तरह 4 से 5 सिंचाई की जरूरत नहीं होती. सिर्फ दो सिंचाई ही काफी है.
इस समय सिंचाई करना सही
विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर चना ड्राई सॉयल यानी सूखी जमीन में बोया गया है, तो उगने के बाद पहली सिंचाई 30 से 35 दिन की अवस्था में करना सही रहता है. यह समय पौधे की बढ़वार के लिए सबसे अहम होता है. इससे जड़ें मजबूत होती हैं और पौधा अच्छे से विकसित होता है. दूसरी सिंचाई घेटा बनने या दाना बनने की अवस्था में करनी चाहिए. यह अवस्था लगभग 70 से 75 दिन में आती है. इस समय दी गई सिंचाई से फलियां अच्छी बनती हैं और दाने भरपूर विकसित होते हैं. इससे उत्पादन बढ़ने की पूरी संभावना रहती है.
सबसे जरूरी बात
तीसरी और सबसे जरूरी बात ये कि फूल आने के समय सिंचाई बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि फूल निकलते ही अगर खेत में पानी दिया गया, तो इसका नुकसान ज्यादा होगा. इस समय पानी मिलने से फूल झड़ने लगते हैं, जिससे फलियां कम बनती हैं. नतीजा होता है कि खेत हरा-भरा दिखता है, लेकिन दाना कम बनता है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर किसान इन तीन बातों का सही समय पर ध्यान रखें, तो चने की फसल से न सिर्फ उम्मीद से कहीं ज्यादा उत्पादन लिया जा सकता है, बल्कि मुनाफा भी कई गुना बढ़ा सकते हैं.




