छत्तीसगढ़

सारागाँव देवरी स्टेशन को चौथी रेल लाइन से जोड़ने का कार्य हुआ पूरा |बिलासपुर–झारसुगुड़ा चौथी रेल लाइन परियोजना – दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की महत्वपूर्ण पहल |

सारागाँव देवरी स्टेशन को चौथी रेल लाइन से जोड़ने का कार्य हुआ पूरा |
बिलासपुर–झारसुगुड़ा चौथी रेल लाइन परियोजना – दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की महत्वपूर्ण पहल |

छत्तीसगढ़ बिलासपुर भूपेंद्र साहू ब्यूरो रिपोर्ट/ 18 नवम्बर 2025/ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, यात्रियों को सुरक्षित, सुगम एवं समयबद्ध रेल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए अधोसंरचना विकास में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है। क्षमता आवर्धन के कार्यों को तीव्र गति से क्रियान्वित किया जा रहा है, जिससे परिचालन की दक्षता बढ़ने के साथ-साथ यात्री सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।इसी क्रम में,बिलासपुर–झारसुगुड़ा चौथी रेल लाइन परियोजना दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की एक महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में प्रगति पर है। यह व्यस्त रेल मार्ग उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाली प्रमुख कड़ी है, जहाँ ट्रेनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने हेतु नई लाइनों का निर्माण कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है । वर्तमान में 206 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है, जिसमें से लगभग 155 किलोमीटर से अधिक का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसी क्रम में सारागाँव देवरी रेलवे स्टेशन को चौथी लाइन से जोड़ने हेतु प्री-एनआई एवं एनआई का कार्य किया गया । इस महत्त्वपूर्ण कार्य के दौरान 02 टर्नआउट हटाकर 04 नए टर्नआउट स्थापित किए गए । लगभग 1100 मीटर नई रेलवे लाइन बिछाकर एक अतिरिक्त लूप लाइन का निर्माण किया गया, जिससे अतिरिक्त गाड़ियों का सुचारु परिचालन सुनिश्चित होगा । नई लाइन के साथ स्टेशन पर अत्याधुनिक सिग्नलिंग एवं इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) प्रणाली स्थापित की गई है, जिसमें डुअल वीडीयू, कवच-रेडी इंटरफेस तथा पॉइंट हज़ार्ड सर्किट जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा तत्व शामिल हैं ।

इस कार्य में 300 से अधिक समर्पित कर्मी, 10 इंजीनियर, 10 स्टेशन मास्टर तथा 03 मुख्य यातायात निरीक्षक ठंड भरे मौसम में भी दिन-रात जुटे रहे । इन सभी आधुनिक प्रणालियों के समावेश के साथ स्टेशन को भविष्य के उच्च-सुरक्षा एवं उच्च-क्षमता युक्त रेल संचालन के लिए तैयार किया गया है । दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का यह प्रयास यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा एवं परिचालन की दक्षता को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल है। इन कार्यों के पूर्ण होने पर न केवल रेल संचालन की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, बल्कि यात्रियों को भी समयबद्ध, सुरक्षित और बेहतर यात्रा का अनुभव प्राप्त होगा।

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