भानपुरी उप तहसील लोकार्पण में जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों को स्थान ना मिलना क्षेत्र की जानता का अपमान :- निर्देश दीवान

*भानपुरी उप तहसील लोकार्पण में जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों को स्थान ना मिलना क्षेत्र की जानता का अपमान :- निर्देश दीवान*
*🟥जिला प्रशासन बताये करन्दोला में उपतहसील का लोकार्पण था या राजीव कांग्रेस भवन का लोकार्पण*
*भानपुरी:-* *जिला पंचायत सदस्य और भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश मंत्री निर्देश दीवान ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा की भानपुरी को उप तहसील पूर्व को भाजपा सरकार की देन हैं जिसे कॉग्रेस नेता लोकार्पण कर वाह-वाही लूटने का प्रयास कर रहे हैं क्षेत्र की जनता सब समझ रही हैं, शुक्रवार को जिला प्रशासन द्वारा करन्दोला भानपुरी में उपतहसील कार्यालय का लोकार्पण किया गया परंतु किसी भी नजर से यह शासकीय कार्यक्रम नहीं लगा।लोकार्पण पत्थर एवं आमत्रंण पत्र में जिला पंचायत उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष सहित क्षेत्रीय जिला सदस्य, जनपद सदस्य तक का नाम नहीं था, ना ही मंच पर उनको आमंत्रित किया गया, पूरे कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं की ही मनमर्जी चल रही थी मंच पर भी कांग्रेस नेताओं को ही जगह दी गयी थी।और जब जिला प्रशासन के नेतृत्व में कार्यक्रम था तो किस हिसाब से बस्तर सांसद राजनीतिक भाषण बाजी कर रहे थे क्यों वहां पर उपस्थित जनता को विधायक चंदन कश्यप को फिर से वोट देने की अपील कर रहे थे। यही प्रोटोकॉल होता है क्या प्रशासन जवाब दे?*
*श्री दीवान ने कहा की जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों की उपेक्षा कर पार्टी विषेश के पदाधिकारीयों को मंच में स्थान देना कॉग्रेस की ओछी राजनीति का परिचय हैं और क्षेत्र की जनता का अपमान हैं। आगे कहा कि भानपुरी उप तहसील अस्थाई भवन में संचालित हो रही हैं जो पूर्व से नियत हैं कॉग्रेस सरकार को तत्काल नए भवन का निर्माण कर तहसील संचालित करना चाहिए।*
*🟥प्रशासन को आज समाज प्रमुखों की याद नहीं आयी*
*कोरोना काल के समय प्रशासन सर्व समाज प्रमुखों की लगातार बैठक लेकर सहयोग के कहते थे और समाज प्रमुखों ने भी अपने स्तर पर समाज के लोगों को जागरूक किया, शादी विवाह कार्यक्रम को रोकने के साथ ही दुख कार्यक्रमों में भी भीड़ कम करने के लिए सामाजिक स्तर पर बेहतर प्रयास किया उसी का नतीजा है भानपुरी क्षेत्र में कोरोना का असर दूसरे क्षेत्र से कम रहा। परंतु जब उपतहसील का लोकार्पण हुआ तो समाज प्रमुखों को निमत्रंण तक नहीं दिया गया।*


