भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्मोत्सव 22 अप्रैल 2023 को मनाया जा रहा है. इस दिन अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त भी है. इसके अलावा देव गुरु बृहस्पति भी राशि परिवर्तन कर रहे हैं जिसका असर चार राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा.भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठवां अवतार माना जाता है. हर वर्ष वैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को परशुराम जयंती मनाई जाती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस दिन परशुराम जयंती पड़ रही है उसी दिन देव गुरु बृहस्पति एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करने वाले हैं. ये राशि परिवर्तन राशि चक्र की 12 राशियों में से चार राशि के जातकों के लिए लाभकारी मानी जा रही है. वे कौन सी भाग्यशाली चार 4 राशियां हैं आइए जानते हैं हमारे कवर्धासंदेश के रायपुर निवासी ज्योतिषी एवं भागवताचार्य पंडित मनोज शुक्ला से
👉पहला राशि है
मेष राशि के जातक
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन जातकों की राशि मेष है उनके लिए यह समय शुभ माना जा रहा है.जो लोग व्यापार से जुड़े हैं उन्हें आर्थिक लाभ होगा. नौकरी पेशा लोगों को अपने सहयोगियों का साथ मिलेगा. सेहत में सुधार होगा, पुराने मित्रों से मुलाकात हो सकती है. अटका हुआ धन प्राप्त हो सकता है.
👉दूसरी है
मिथुन राशि के जातक
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन जातकों की राशि मिथुन है उनकी सेहत में सुधार होगा. पारिवारिक की यात्रा हो सकती है. यदि कहीं इंटरव्यू देने जा रहे हैं तो उसमें सफलता के योग हैं. मेहनत के अनुसार परिणाम प्राप्त हो सकता है. निवेश के लिए सर्वोत्तम समय है काम करने में मन लगेगा.
👉तीसरी है
सिंह राशि के जातक
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन जातकों की राशि सिंह है उनके लिए यह समय मान सम्मान में वृद्धि लेकर आ रहा है. कार्यस्थल पर उच्च अधिकारी आपके काम से प्रसन्न होंगे. शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं. भगवान विष्णु की कृपा से उन्नति प्राप्त होगी. रचनात्मक क्षमता में वृद्धि होगी.
👉 चौथी है
धनु राशि के जातक
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन जातकों की राशि धनु है इस समय उनकी मुलाकात पुराने मित्रों से हो सकती है. नौकरी पेशा लोगों को पदोन्नति के अवसर प्राप्त हो सकते हैं. सेहत में सुधार होगा. परिजनों के साथ संबंधों में मधुरता आएगी. भगवान विष्णु की कृपा मिलेगी जिससे नौकरी और व्यापार में उन्नति के योग बन रहे हैं.
अब आगे और भी उपाय आपको जानना चाहिए
हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान परशुराम का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। भगवान परशुराम महर्षि जमदग्नि और रेणुका की संतान हैं।
22 अप्रैल 2023 को अक्षय तृतीया का पर्व है और इस तिथि पर भगवान विष्णु के सभी दस अवतारों में छठें अवतार माने गए भगवान परशुराम की जंयती भी मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान परशुराम का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। भगवान परशुराम महर्षि जमदग्नि और रेणुका की संतान हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम का प्राकट्य काल प्रदोष काल में हुआ था और ये 8 चिरंजीवी पुरुषों में एक हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम आज भी इस धरती पर मौजूद हैं। परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया पर किया गया दान-पुण्य कभी क्षय नहीं होता। अक्षय तृतीया के दिन जन्म लेने के कारण ही भगवान परशुराम की शक्ति भी अक्षय थी। 8 चिरंजीवियों में भगवान परशुराम समेत महर्षि वेदव्यास, अश्वत्थामा, राजा बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और ऋषि मार्कंडेय हैं जो आज भी इस कलयुग में विचरण कर रहे हैं। शास्त्रों में अष्टचिरंजीवियों का वर्णन कुछ इस तरह से मिलता है।
अश्वत्थामा बलिव्यासो हनूमांश्च विभीषण:। कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥
सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्। जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।
अर्थात: अश्वथामा, दैत्यराज बलि, वेद व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि, इनका रोज सुबह जाप करना चाहिए। इनके जाप से भक्त को निरोगी शरीर और लंबी आयु मिलती है।
अश्वत्थामा- गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वथामा भी चिरंजीवी है। शास्त्रों में अश्वत्थामा को भी अमर बताया गया है।
राजा बलि- भक्त प्रहलाद के वंशज हैं राजा बलि।भगवान विष्णु के भक्त राजा बलि भगवान वामन को अपना सबकुछ दान कर महादानी के रूप में प्रसिद्ध हुए। इनकी दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इनका द्वारपाल बनना स्वीकार किया था।
हनुमानजी- त्रेता युग में श्रीराम के परम भक्त हनुमानजी को माता सीता ने अजर-अमर होने का वरदान दिया था। इसी वजह से हनुमानजी भी चिरंजीवी माने हैं।
ऋषि मार्कंडेय- भगवान शिव के परमभक्त ऋषि मार्कंडेय अल्पायु थे, लेकिन उन्होंने महामृत्युंजय मंत्र सिद्ध किया और वे चिरंजीवी बन गए।
वेद व्यास- वेद व्यास चारों वेदों ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद और यजुर्वेद का संपादन और 18 पुराणों के रचनाकार हैं।
परशुराम- भगवान विष्णु के दशावतारों में एक हैं परशुराम। परशुरामजी ने पृथ्वी से 21 बार अधर्मी क्षत्रियों का अंत किया गया था।
विभीषण- रावण के छोटे भाई और श्रीराम के भक्त विभीषण भी चिरंजीवी हैं।
कृपाचार्य- महाभारत काल में युद्ध नीति में कुशल होने के साथ ही परम तपस्वी ऋषि है। कृपाचार्य कौरवों और पांडवों के गुरु है।
राम से परशुराम बनने की कथा
भगवान परशुराम का जन्म माता रेणुका की कोख से हुआ था। जन्म के बाद इनके माता-पिता ने इनका नाम राम रखा था। बालक राम बचपन से ही भगवान शिव के परम भक्त थे। ये हमेशा ही भगवान की तपस्या में लीन रहा करते थे। तब भगवान शिव ने इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर इन्हें कई तरह के शस्त्र दिए थे जिसमें एक फरसा भी था । फरसा को परशु भी कहते हैं इस कारण से इनका नाम परशुराम पड़ा
भगवान परशुराम ने श्रीकृष्ण को दिया था सुदर्शन चक्र
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम ने श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र दिया था। दरअसर गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण के दौरान भगवान कृष्ण की मुलाकात परशुराम जी से हुई तभ उन्होंने भगवान कृष्ण को सुदर्शन चक्र दिया था।
पृथ्वी को 21 बार किया था क्षत्रिय विहीन
परशुराम जी का जन्म ब्राह्राण कुल में हुआ था लेकिन उनका ये अवतार बहुत ही तीव्र, प्रचंड और क्रोधी स्वाभाव का था।
भगवान परशुराम ने अपने माता-पिता के अपमान का बदला लेने के लिए इस पृथ्वी को 21 बार क्षत्रियों का संहार करके विहीन किया था। इसके अलावा अपने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए अपनी माता का भी वध कर दिया था। लेकिन वध करने के बाद पिता से वरदान प्राप्त करके फिर से माता को जीवित कर दिया था।