रेलवे चलाएगा रोजाना 100 श्रमिक स्पेशल ट्रेन, अबतक 513 ट्रेन चली, 6 लाख से ज्यादा श्रमिक पहुंचे घर | Railways will run 100 laborers special trains daily 513 trains have run till date | nation – News in Hindi

इन राज्यों में चली इतनी ट्रेन
जो 363 रेलगाड़ियां अपने गंतव्य स्थल पर पहुंची हैं उनमें आंध्र प्रदेश (एक रेलगाड़ी), बिहार (100 रेलगाड़ियां), हिमाचल प्रदेश (एक रेलगाड़ी), झारखंड (22 रेलगाड़ियां), मध्य प्रदेश (30 रेलगाड़ियां), महाराष्ट्र (तीन रेलगाड़ियां), ओडिशा (25 रेलगाड़ियां), राजस्थान (चार रेलगाड़ियां), तेलंगाना (दो रेलगाड़ियां), उत्तर प्रदेश (172 रेलगाड़ियां), पश्चिम बंगाल (दो रेलगाड़ियां) और तमिलनाडु (एक रेलगाड़ी) शामिल हैं. इन ट्रेनों से प्रवासी लोगों को तिरुचिरापल्ली, तितलागढ़, बरौनी, खंडवा, जगन्नाथपुर, खुर्दा रोड, प्रयागराज, छपरा, बलिया, गया, पूर्णिया, वाराणसी, दरभंगा, गोरखपुर, लखनऊ, जौनपुर, हटिया, बस्ती, कटिहार, दानापुर, मुजफ्फरपुर और सहरसा आदि शहरों तक पहुंचाया गया है.
अब 1200 की जगह 1700 यात्री करेंगे सफ़रअधिक से अधिक प्रवासी श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने के लिए अब सोमवार से प्रत्येक श्रमिक विशेष रेलगाड़ी में 1,200 की जगह लगभग 1,700 यात्रियों को ले जाया गया. केन्द्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने एक बयान में कहा, ‘एमएचए और रेल मंत्रालय ने श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों से प्रवासी श्रमिकों को ले जाये जाने पर आज सुबह एक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की.’ इसमें राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया. वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा की गई और इस बात पर जोर दिया गया कि प्रवासी श्रमिकों को आश्वस्त किया जाना चाहिए कि घर जाने के इच्छुक सभी लोगों की यात्रा के लिए पर्याप्त संख्या में रेलगाड़ियां चलाई जाएंगी.
रोज 100 से ज्यादा चलेंगी ट्रेन
प्रवासी श्रमिकों को जल्द से जल्द उनके पैतृक स्थानों पर ले जाने के लिए अगले कुछ हफ्तों तक प्रतिदिन सौ से अधिक रेलगाड़ियों को चलाये जाने की उम्मीद है. अधिकारियों ने बताया कि शुरुआत में इन ट्रेनों का कोई ठहराव नहीं था, लेकिन रेलवे ने सोमवार को घोषणा की कि गंतव्य राज्य में तीन स्टेशनों पर ठहरने की अनुमति दी जा सकती है. कई राज्य सरकारों के अनुरोध के बाद यह बदलाव किया गया है. प्रत्येक श्रमिक विशेष रेलगाड़ी में 24 डिब्बे होते हैं और प्रत्येक में 72 सीट होती हैं. अब तक सामाजिक दूरी बनाये रखने के लिए एक डिब्बे में केवल 54 लोगों को यात्रा की अनुमति दी जा रही है.
रेलवे ने अभी तक विशेष सेवाओं पर होने वाली लागत की घोषणा नहीं की है. लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिये हैं कि रेलवे ने प्रति सेवा लगभग 80 लाख रुपये खर्च किए हैं. इससे पहले सरकार ने कहा था कि सेवाओं की लागत राज्यों के साथ 85:15 के अनुपात में साझा की गई है.
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