राजा रानी ने इस गुफा में 5 हजार साल पहले मनाई थी सुहागरात, आज भी मौजूद है पेंटिंग, पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र

हजारीबाग: झारखंड का हजारीबाग जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और पहाड़ी भू-भाग के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके साथ ही यह इलाका इतिहास और रहस्यों का भी अनमोल खजाना है. यहां ऐसे कई स्थल मौजूद हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है. इन स्थानों को देखकर यह एहसास होता है कि हजारीबाग की धरती ने हजारों वर्षों के मानव जीवन और सभ्यता को अपने भीतर समेट कर रखा है. प्रकृति और इतिहास का यह अनूठा मेल इस जिले को विशेष पहचान देता है.
जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित क्षेत्रों में प्राचीन काल की अद्भुत चित्रकला देखने को मिलती है. चट्टानों और गुफाओं की दीवारों पर बनी ये कलाकृतियां आज भी उतनी ही स्पष्ट हैं, जितनी हजारों साल पहले रही होंगी. इन चित्रों में मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है. कहीं शिकार करते आदिमानव दिखाई देते हैं, तो कहीं समूह में नृत्य करते लोग. यह चित्र उस दौर की सामाजिक संरचना, रहन-सहन और जीवन शैली को समझने में मदद करते हैं.
सुहागरात के लिए तैयार की गई थी गुफा!
इस्को गुफा को लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई रोचक मान्यताएं प्रचलित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इन चित्रों को बादाम राजा ने बनवाया था. मान्यता है कि राजा ने अपनी शादी के अवसर पर इस गुफा को विशेष रूप से सजवाया था और इसे सुहागरात के लिए तैयार किया गया था. गुफा की दीवारों पर कोहबर कला की झलक भी देखने को मिलती है, जो आज भी झारखंड और बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह के समय बनाई जाती है. इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि यह कला परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है.
हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित इस्को गुफा प्राचीन रॉक आर्ट का प्रमुख केंद्र मानी जाती है. इस गुफा की दीवारों पर उकेरी गई चित्रकला आज भी लोगों को आश्चर्यचकित कर देती है. इन चित्रों में पशु-पक्षियों, मानव आकृतियों, दैनिक कार्यों और सामूहिक गतिविधियों का सुंदर चित्रण किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कला केवल सजावट नहीं, बल्कि उस समय के लोगों की भावनाओं और अनुभवों की अभिव्यक्ति है.
5,000 से 10,000 वर्ष पुराना है रॉक आर्ट
इस्को रॉक आर्ट पेंटिंग की खोज करने वाले पद्मश्री से सम्मानित बुलू इमाम की पुत्रवधु अलका इमाम बताती हैं कि यह रॉक आर्ट लगभग 5,000 से 10,000 वर्ष पुराना है. उनके अनुसार, यह उस समय की कला, संस्कृति और सोच को दर्शाता है, जिसकी झलक आज भी ग्रामीण जीवन में देखी जा सकती



