रिसाली नगर निगम में सफाई व्यवस्था पर संकट के बादल, 600 कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित
एमआईसी बैठकों में फाइलें लंबित, विकास कार्य ठप होने का खतरा

भाजपा पार्षदों का आरोप: महापौर शशि सिन्हा जानबूझकर रोक रही हैं एक्सटेंशन
15 जनवरी के बाद 600 से अधिक कर्मचारियों की आजीविका पर संकट
विधि यादव का बयान: उदासीनता से शहर को भुगतना पड़ेगा खामियाजा
दुर्ग / बड़ी खबर छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से, जहां रिसाली नगर निगम की सफाई व्यवस्था गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ी है। 600 से अधिक सफाई और प्लेसमेंट कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। महापौर इन काउंसिल की बैठकों में बार-बार लंबित फाइलों के कारण शहर की स्वच्छता व्यवस्था चरमराने की कगार पर है। विपक्षी भाजपा ने महापौर शशि सिन्हा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
रिसाली, 6 जनवरी 2026। रिसाली नगर निगम के 40 वार्डों में कार्यरत 480 से ज्यादा सफाई कर्मी और 120 से अधिक प्लेसमेंट कर्मचारी इस समय आर्थिक संकट के भंवर में फंसते नजर आ रहे हैं। उनके एक्सटेंशन से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें एमआईसी की बैठकों में बार-बार अटक रही हैं। यदि 15 जनवरी तक फैसला नहीं हुआ, तो इन 600 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी छिन सकती है, जिसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ेगा।
एक तरफ राज्य की भाजपा सरकार नगर निगमों को विकास के लिए उदार फंड दे रही है, वहीं कांग्रेस नियंत्रित रिसाली निगम पर विकास कार्यों की अनदेखी के आरोप लग रहा हैं। भाजपा पार्षदों का कहना है कि महापौर शशि सिन्हा और उनकी एमआईसी जानबूझकर इन फाइलों को रोके हुए हैं।
टंकी मरौदा वार्ड की भाजपा पार्षद विधि यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा – “महापौर और एमआईसी की उदासीनता के कारण सफाई कर्मचारियों का भविष्य खतरे में है। फाइलें जानबूझकर रोकी जा रही हैं, जिसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ेगा।”
निगम सूत्रों के मुताबिक, यह मामला लंबे समय से लंबित है। विपक्ष का दावा है कि शीघ्र निर्णय न होने से स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। महापौर कार्यालय से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
यह विवाद सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव को और गहरा सकता है। शहरवासी अब प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि क्या रिसाली निगम में सफाई कर्मचारियों का संकट जल्द हल होगा?




