12 घंटे काम करें कर्मचारी, श्रम कानून से मिले राहत, जानिए कर्मचारी एसोसिएशन ने सरकार से क्या मांग की – Employers Associations seeks relaxation in labour law know the full list of what the ask from Government | business – News in Hindi

साथ ही कहा गया है कि कर्मचारियों को दी जाने वाली सैलरी को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) माना जाए और कर्मचारी व नियोक्ताओं के लिए सोशल सिक्योरिटी कॉस्ट को घटाया जाए. इंडस्ट्रीज के लिए सब्सिडाइज्ड पावर और फाइनेंशियल पैकेज की भी मांग की गई है. पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार ने श्रम कानून में कुछ नियमों को छोड़कर अन्य नियमों में ढील दी है. कर्मचारी एसोसिएशन ने श्रम मंत्रालय को इन मांगों की लिस्ट भी दी है.
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1. लॉकडाउन की अवधि के लिए ले ऑफ के तौर पर मानने के लिए इंडस्ट्रियल डिसप्यूट्स एक्ट के ढील दी जाए.2. इंडस्ट्रीज द्वारा लिक्विडिटी की समस्या को देखते हुए कर्मचारियों की दिए जाने वाले मेहनताने को CSR फंड के खर्च के तौर पर माना जाए.
3. इंडस्ट्रीज खुलने के बाद अधिकतम वर्कफोर्स को 33 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया जाए. इससे वस्तुओं और सेवाओं का मांग के हिसाब से तैयार करने में मदद मिलेगी.
4. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 15,000 रुपये व उससे कम सैलरी वाले कर्मचारियों का दायर बढ़ाया जाए ताकि अधिक से अधिक वर्कर्स तक इसका लाभ पहुंच सके.
5. श्रम कानून को दो से तीन साल के लिए सस्पेंड कर दिया जाए. हालांकि, इसमें न्यूनतम मेहनताना, बोनस समेत अन्य खर्च को शामिल किया जाए. कहा गया कि इससे इंडस्ट्रीज को मौजूदा संकट की स्थिति से बाहर निकलने में आसानी होगी.
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6. कर्मचारियों के लिए प्रतिदिन वर्किंग समय को बढ़ाकर 12 घंटे किया जाए.
7. इंडस्ट्रीज को उचित राहत पैकेज मुहैया कराया जाए ताकि बेरोजगारी न बढ़े.
8. इंडस्ट्रीज को पावर सप्लाई सब्सिडी दर पर मुहैया कराया जाए.
9. प्रावासी मजदूरों को वापस लाने के लिए भी प्रोग्राम चलाया जाए ताकि कोविड-19 को लेकर उनका डर खत्म हो. उनके लिए ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और
10. महीनों के लिए मुफ्त ग्रोसरीज का प्रबंध किया जाए.
11. प्रवासी मजूदरों का डेटा बैंक तैयार किया जाए.
12. वर्कर्स और असंगठित सेक्टर, व दिहाड़ी मजूदरों के लिए नेशनल एमिडेमिक फंड बनाया जाए.
13. कर्मचारी और नियोक्ता पर सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कॉस्ट को कम किया जाए.
इसमें यह भी कहा गया कि रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन की जगह केवल दो ही ज़ोन बनाया जाए. केवल दो ही ज़ोन होने चाहिए- कंटेनमेंट ज़ोन और नॉन-कंटेनमेंट ज़ोन. ऐसा करने से वस्तुओं और वर्कर्स की आवाजाही सुविधाजनक होगी. नॉन-कंटेनमेंट ज़ोन में सभी एक्टिविटीज को शुरू किया जाए.
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