देश दुनिया

बटन मशरूम की ट्रेनिंग, 60-65 दिन में डेढ़ से 2 किलो उत्पादन

विदिशा| मशरूम उत्पादन में बढ़ती मांग और रोजगार के बेहतर अवसरों को देखते हुए पंजाब नेशनल बैंक कृषक प्रशिक्षण केंद्र ने युवाओं के लिए बटन मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण रखा। केंद्र के डायरेक्टर अजय सिंह परिहार ने बताया कि मशरूम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल्स भरपूर होते हैं। यह सेहत के लिए लाभकारी है। इसी वजह से बटन मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि महाविद्यालय गंजबासौदा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आशीष श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में हुआ। प्रशिक्षणार्थियों को कंपोस्ट तैयार करने, स्पानिंग, केसिंग, हार्वेस्टिंग की पूरी जानकारी दी गई। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि कंपोस्ट बनने में करीब 28 दिन लगते हैं। 6 से 7 बार पलटाई होती है। कंपोस्ट के लिए 100 किलो गेहूं का भूसा, 40 किलो मुर्गी की खाद, 20 किलो गेहूं का चोकर, 4 किलो जिप्सम, डेढ़ किलो यूरिया चाहिए। तैयार कंपोस्ट में 10% बटन मशरूम का बीज मिलाया जाता है। इसे 5 किलो के पॉलिथीन बैग में भरा जाता है।

बैग 12 दिन अंधेरे में रखा जाता है। इससे माइसीलियम फैलता है। इसके बाद नमी के लिए बैग के ऊपर कोकोपीट या सड़ी गोबर खाद डाली जाती है। हर दो दिन पानी का छिड़काव होता है। करीब 15 दिन में फ्रूटिंग शुरू होती है। 60 से 65 दिन में एक बैग से 1.5 से 2 किलो ताजा मशरूम मिल सकता है।

किसान चंद्र प्रकाश ने कहा कि प्रशिक्षण केंद्र जिस खेती का प्रशिक्षण देता है, उसकी बाजार में बिक्री और चलन के लिए भी प्रयास होने चाहिए। प्रशिक्षण के बाद युवा यहां से सीखकर अपने खेतों में प्रयोग करते हैं। हमने भी मशरूम का प्रयोग किया। अच्छे परिणाम मिले। बेचने के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर चलन बने। बिक्री के लिए प्रयास हों। तब यह केंद्र सबसे बेहतर साबित होगा। प्रशिक्षण में 20 किसान शामिल हैं।

Related Articles

Back to top button