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कोयला तस्करों ने बांटी 20 हजार की रेकी की नौकरी, ढोने वालों को ~1000 प्रतिदिन देते हैं

सीसीएल की बोकारो-करगली क्षेत्र के बगल में स्थित जंगलों में कोयला माफिया अवैध खनन कर प्रतिदिन लाखों की कोयला चोरी कर रहे हैं। इसके लिए सीसीएल के तर्ज पर वे अवैध तरीके से सैकड़ों निजी वर्कर भी रखे हैं। माफियाओं ने अवैध खनन स्थल से जंगल में स्टॉक स्थल तक रेकी करने के लिए दर्जनों लोगों को नियुक्त किया है। जबकि साइकिल तथा बाइक से कोयला ढोने के लिए भी सैकड़ों लोगों को काम पर रखा है। मजेदार बात यह है कि चार साइकिल पर एक बाइक चालक बहाल किश जाता है। ये बाइक चालक कोयला लदी साइकिलों को खींचकर खदान से जंगल तक पहुंचाते हैं। यहां कोयला स्टॉक कर रात के अंधेरे में ट्रक पर लोड कर डेहरी और बनारस भेजे जाते हैं। इनकी सेटिंग ऐसी है कि अवैध कोयला लदे ट्रक सड़क पर आते ही एक नंबर पेपर लग जाता है। चर्चा है इसमें पुलिस से ‘पास’ लेकर ट्रकों को भेजा जाता है। वहीं सीसीएल के अधिकारी तक शामिल हैं। यही वजह है कि उनपर कोई कार्रवाई नहीं होती है।

मजदूरों ने कहा- रोजगार के अभाव में अवैध खनन मजबूरी

नाम न छापने के आग्रह पर कुछ स्थानीय लोगों ने कहा कि क्षेत्र में रोजगार के अवसर सीमित हैं। बाहर काम की तलाश में जाने पर भी स्थाई काम नहीं मिलता, कई बार ठेकेदार मजदूरी तक नहीं देते। ऐसे में आर्थिक तंगी के कारण लोग जोखिम उठाकर अवैध सुरंगों में काम करने को मजबूर हो जाते हैं। हालांकि इस अवैध खनन व कारोबार से न केवल राजस्व की भारी क्षति है, बल्कि जान जोखिम में डालकर काम कर रहे मजदूरों के लिए भी बड़ा खतरा है। प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन की सक्रियता पर अब स्थानीय लोगों की नजर टिकी है।

ऐसे समझें, निजी वर्करों को कितने पैसे देते हैं माफिया

{रैकी करने वालों को प्रति माह 15 से 20 हजार रुपए तक दिए जाते हैं।

{बाइक से कोयला ढोने वालों को 800 से 1000 रुपए प्रतिदिन ट्रिप के मिलते हैं।

{ट्रैक्टर से ढुलाई करने वालों को 4 से 5 हजार रुपए तक की आमदनी दी जाती है।

{ट्रक से कोयला भेजने वालों को प्रति ट्रिप एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक की कमाई करते हैं।

अवैध कारोबारियों ने पूरा संगठित तंत्र विकसित कर लिया है। इसमें रैकी करने वालों से लेकर सुरंग में कोयला निकालने वाले, बाइक व ट्रैक्टर से ढुलाई करने वाले, स्टॉक पर पहचान करने वाले और आगे बड़े ट्रकों से अन्य राज्यों जैसे डेहरी–बनारस तक भेजने की कड़ी शामिल है।

जंगलों में दर्जनों अवैध माइंस, काटने, ढोने व मंडी तक पहुंचाने का रेट अलग-अलग

बेरमो अनुमंडल क्षेत्र के सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के आसपास क्षेत्र में कोयला खनन का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। खासमहल, कारो तथा बोकारो कोलियरी क्षेत्र के घने जंगलों में दर्जनों अवैध कोल माइंस सुरंग धड़ल्ले से संचालित हैं। यहां कोयला काटने, ढोने और मंडी तक पहुंचाने का रेट अलग-अलग है। खासमहल परियोजना से सटे जंगल स्थित सूतो पानी, पिपरादह व बोकारो कोलियरी कार्यालय के पीछे सतसिमरा के जंगलों में बड़े पैमाने पर अवैध सुरंग बनाकर कोयला निकाला जा रहा है। इसी तरह कारो परियोजना के चरकपानिया जंगल क्षेत्र में भी कई अवैध माइंस संचालित है। कारो परियोजना फेज 2 के दूसरे भाग में भी गतिविधियां जारी हैं। घने जंगलों के बीच कच्ची सड़क बनाकर सुरंग तक पहुंच बनाई गई है, जहां रात में ट्रैक्टरों की आवाजाही होती है। इन क्षेत्रों को पूर्व का उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र बताकर इन क्षेत्रों में प्रशासनिक या पुलिस गश्ती लगभग नगण्य है, जिससे अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं।

वहीं खासमहल परियोजना के स्टॉक से देर रात करीब तीन बजे से कोयला चोरी की जाती है। पहले इसे स्टेशन के पीछे मुख्य मार्ग पर डंप किया जाता है, फिर घरों के आसपास अस्थाई रूप से रखा जाता है। रात के समय पिकअप वैन से कोयला राइफल कॉलोनी के समीप ले जाकर ट्रकों में लोड कर मंडियों में भेज दिया जाता है।

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