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मुंबई में मजदूरी करता था दंपति, हजारीबाग लौट शुरू किया यह काम, आय बढ़कर हुई 5 गुनी, 5-6 को दे रखा है रोजगार

हजारीबाग: हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड अंतर्गत हरहद गांव के एक दंपति ने मुर्गीपालन के व्यवसाय में ऐसी मिसाल पेश की है, जो आज ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी बन चुकी है. कभी मुंबई की चकाचौंध में मजदूरी कर किसी तरह परिवार चलाने वाला यह परिवार आज अपने ही गांव में न केवल सम्मानजनक जीवन जी रहा है, बल्कि दूसरों को रोजगार भी दे रहा है.

हरहद गांव निवासी यह दंपति पहले रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई गया था. महानगर में मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा था. सीमित आमदनी और महंगाई ने हालात और चुनौतीपूर्ण बना दिए थे. किसी कारणवश जब परिवार एक बार गांव लौटा, तो फिर मुंबई वापस जाने का निर्णय नहीं लिया. गांव में रहकर ही कुछ नया करने का संकल्प लिया गया और यहीं से मुर्गीपालन के व्यवसाय की कहानी की शुरुवात हुई.

प्रियंका चला रहीं मुर्गी फॉर्म
परिवार की महिला सदस्य प्रियंका देवी आज मुर्गी फॉर्म की संचालिका हैं और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं. प्रियंका देवी बताती हैं कि वे और उनके पति दोनों मुंबई में मजदूरी करते थे, जहां महीने की कमाई महज 10 हजार रुपये थी. इतने कम पैसे में मुंबई जैसे महंगे शहर में परिवार का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया था. ऐसे में उन्होंने गांव लौटकर स्वरोजगार अपनाने का फैसला किया.

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गांव में सबसे पहले उन्होंने ब्रायलर मुर्गा पालन से व्यवसाय की शुरुआत की. कुछ अनुभव मिलने के बाद उन्होंने देसी मुर्गी पालन की ओर रुख किया. धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और आज उनके फार्म हाउस में 3 हजार से अधिक देसी मुर्गियां तैयार हो रही हैं. देसी मुर्गे की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण उनकी आमदनी में लगातार इजाफा हुआ है.

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आय हुई 5 गुनी
जो परिवार कभी 10 हजार रुपये मासिक मजदूरी पर निर्भर था, आज वही परिवार अपने फार्म हाउस में तीन से पांच मजदूरों को रोजगार दे रहा है. वर्तमान में उनकी मासिक आमदनी लगभग 50 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है. इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया है.

प्रियंका देवी कहती हैं कि अगर इंसान ठान ले और मेहनत से काम करे, तो कोई भी काम असंभव नहीं होता. उन्होंने कहा कि अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने से वे आज अपने घर में रहकर काम कर पा रही हैं और परिवार के साथ समय भी बिता रही हैं. गांव में रहकर ही आत्मसम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीना अब संभव हो सका है.

आर्थिक स्थिति में बदलाव
ग्रामीणों का कहना है कि यह परिवार पहले आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और रोजगार की कमी के कारण पलायन करने को मजबूर था. लेकिन गांव लौटकर व्यवसाय शुरू करने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए. आज यह परिवार गांव में ही रोजगार सृजन कर रहा है और दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुका है.

हरहद गांव का यह उदाहरण साबित करता है कि अगर सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर भी आत्मनिर्भर और सफल जीवन की नींव रखी जा सकती है.गांव में सबसे पहले उन्होंने ब्रायलर मुर्गा पालन से व्यवसाय की शुरुआत की. कुछ अनुभव मिलने के बाद उन्होंने देसी मुर्गी पालन की ओर रुख किया. धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और आज उनके फार्म हाउस में 3 हजार से अधिक देसी मुर्गियां तैयार हो रही हैं. देसी मुर्गे की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण उनकी आमदनी में लगातार इजाफा हुआ है

आय हुई 5 गुनी
जो परिवार कभी 10 हजार रुपये मासिक मजदूरी पर निर्भर था, आज वही परिवार अपने फार्म हाउस में तीन से पांच मजदूरों को रोजगार दे रहा है. वर्तमान में उनकी मासिक आमदनी लगभग 50 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है. इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया है.

प्रियंका देवी कहती हैं कि अगर इंसान ठान ले और मेहनत से काम करे, तो कोई भी काम असंभव नहीं होता. उन्होंने कहा कि अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने से वे आज अपने घर में रहकर काम कर पा रही हैं और परिवार के साथ समय भी बिता रही हैं. गांव में रहकर ही आत्मसम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीना अब संभव हो सका है.

आर्थिक स्थिति में बदलाव
ग्रामीणों का कहना है कि यह परिवार पहले आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और रोजगार की कमी के कारण पलायन करने को मजबूर था. लेकिन गांव लौटकर व्यवसाय शुरू करने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए. आज यह परिवार गांव में ही रोजगार सृजन कर रहा है और दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुका है.

हरहद गांव का यह उदाहरण साबित करता है कि अगर सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर भी आत्मनिर्भर और सफल जीवन की नींव रखी जा सकती है.

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