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नर्सरी से लेकर, सही जुताई, रोपाई और लीफ कटिंग तक, प्याज की खेती के 4 नियम, तेजी से बढ़ाते कंद

कोडरमा. जिले में आलू की बेहतर पैदावार के बाद अब किसानों ने प्याज की खेती की ओर रुख कर लिया है. प्याज को एक लाभकारी फसल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद है. जिले के कई इलाकों में दिसंबर और जनवरी महीने में ही बीज के माध्यम से प्याज की नर्सरी तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया था. अब 7 से 8 सप्ताह के बाद प्याज के पौधे रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो चुके हैं और खेतों में हलचल तेज हो गई है.

रोपाई से पहले मिट्टी को भुरभुरा करना जरूरी
किसानों के अनुसार प्याज की खेती में सबसे अहम भूमिका नर्सरी की गुणवत्ता और खेत की सही तैयारी की होती है. महिला किसान लक्ष्मी देवी, जो पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से खेती से जुड़ी हैं, उन्होंने बताया कि उनके परिवार में खेती की परंपरा पुरानी है. पहले घर के बुजुर्ग खेती का काम संभालते थे. अब वही जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. उनके अनुभव के अनुसार, अगर शुरुआत सही हो तो प्याज की पैदावार भी बेहतर होती है.

रोपाई के पहले ठीक से जुताई जरूरी
उन्होंने बताया कि नर्सरी से पौधों की रोपाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करना बेहद जरूरी है. मिट्टी को भुरभुरी बनाकर उसमें गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाई जाती है, जिससे खेत की उर्वरता बढ़ती है. इसके बाद बेड बनाकर रोपाई करना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है. बेड पद्धति से खेती करने पर खेत में पानी निकलने की व्यवस्था बेहतर रहती है और प्याज के कंद को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है, जिससे सड़न की समस्या कम होती है.

लीफ कटिंग भी बहुत जरूरी
उन्होंने बताया कि रोपाई के दौरान दूरी का विशेष ध्यान रखा जाता है. कतार से कतार की दूरी लगभग 15 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखी जाती है. पौधों को बहुत गहराई में नहीं लगाया जाता, बल्कि उनका ऊपरी हिस्सा मिट्टी के स्तर पर ही रखा जाता है. इससे पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं और बढ़त सही तरीके से होती है. प्याज की बेहतर पैदावार के लिए  के किसान आज भी पारंपरिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं. उन्होंने बताया कि लीफ कटिंग तकनीक उनके यहां वर्षों से अपनाई जा रही है.

नहीं झुकता पौधा, होती है बढ़िया बढ़त
इस तकनीक में नर्सरी में तैयार पौधों को खेत में लगाने से पहले ऊपर के आधे से थोड़ा कम हिस्से को काट दिया जाता है. इसके बाद ही रोपाई की जाती है. इससे पौधा सीधा रहता है और झुकने से बचता है. अगर पौधा जमीन पर झुक जाए, तो सड़न और बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि लीफ कटिंग का एक और फायदा यह है कि पौधे की पत्तियों की अनावश्यक बढ़त कम हो जाती है और अधिकांश पोषक तत्व सीधे प्याज के कंद के विकास में लगते हैं. इससे प्याज का आकार बड़ा होता है और उत्पादन में भी वृद्धि होती है.

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