खट्टी-मीठी चटनी के साथ समोसे का स्वाद दोगुना, सुबह से रात तक लगी रहती है भीड़, सरदार जी के समोसे की खासियत

लखीमपुर खीरी : समोसा ऐसा नाश्ता है, जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. सर्दी हो, गर्मी या बरसात, समोसे की लोकप्रियता कभी कम नहीं होती. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के गोला नगर में एक ऐसी ही दुकान है, जहां का समोसा स्वाद के लिए दूर-दूर तक मशहूर है. यहां मिलने वाला समोसा लोगों को इतना पसंद है कि एक बार खाने के बाद वे बार-बार यहां खिंचे चले आते हैं.
गोला में क्यों खास हैं सरदार जी के समोसे
गोला नगर के मोहम्मदी रोड पर, सरायन नदी के पास स्थित सरदार जी के समोसे आज एक पहचान बन चुके हैं. स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी लोग खास तौर पर यहां समोसा खाने आते हैं. दुकान का नाम सुनते ही लोगों को उस खास स्वाद की याद आ जाती है, जो यहां के समोसे को अलग बनाता है.
2017 से शुरू हुआ स्वाद का सफर
दुकान के संचालक सरदार नवजोत सिंह ने बताया कि उन्होंने साल 2017 में इस दुकान की शुरुआत की थी. शुरुआत में समोसा सिर्फ 5 रुपये में मिलता था. समय के साथ लागत बढ़ी, लेकिन स्वाद और गुणवत्ता वही रही. अब समोसा 10 रुपये का मिलता है. उनके अनुसार, स्वाद ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है, जिसकी वजह से आज उनकी दुकान पर भारी भीड़ रहती है.
खास मसालों से बनता है आलू का मिश्रण
सरदार नवजोत सिंह बताते हैं कि उनके यहां समोसे के आलू में खास घरेलू मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. ये मसाले बाहर से नहीं, बल्कि घर पर ही तैयार किए जाते हैं. इसी वजह से समोसे का स्वाद अलग और लाजवाब होता है. आलू की भरावन न ज्यादा तीखी होती है और न ही फीकी, बल्कि हर उम्र के लोगों को पसंद आने वाली होती है.
सेहत का भी रखा जाता है ध्यान
दुकान संचालक का कहना है कि वे क्वालिटी के साथ कभी समझौता नहीं करते. समोसे आज भी फॉर्च्यून तेल में तले जाते हैं. खराब या बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल से परहेज किया जाता है. अच्छी किस्म के आलू और साफ-सुथरे तरीके से बनाए गए मसालों की वजह से समोसे स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिहाज से भी बेहतर माने जाते हैं.
रोजाना बिकते हैं 700 से ज्यादा समोसे
सरदार जी के समोसे की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां रोजाना 700 से अधिक समोसे बिक जाते हैं. कई बार भीड़ इतनी ज्यादा हो जाती है कि ग्राहकों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है. खासकर सुबह और शाम के समय दुकान पर ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है.
खट्टी-मीठी चटनी बढ़ाती है स्वाद
यहां मिलने वाले समोसे को खट्टी-मीठी चटनी के साथ परोसा जाता है. यह चटनी समोसे के स्वाद को दोगुना कर देती है. समोसा और चटनी का यह मेल लोगों को इतना पसंद आता है कि बिना खाए कोई लौटना नहीं चाहता.
सुबह से रात तक लगी रहती है भीड़
यह दुकान सुबह करीब 8 बजे से लेकर रात 10 बजे तक खुली रहती है. दिनभर समोसा खाने के शौकीन यहां आते-जाते रहते हैं. चाहे स्थानीय लोग हों या बाहर से आने वाले श्रद्धालु, जो भोलेनाथ के दर्शन के लिए आते हैं, वे दर्शन के बाद यहां समोसा खाना नहीं भूलते.
स्वाद की वजह से बनी अलग पहचान
सरदार जी के समोसे आज सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि गोला नगर की पहचान बन चुके हैं. स्वाद, गुणवत्ता और साफ-सफाई के चलते यह दुकान लगातार लोगों की पहली पसंद बनी हुई है



