कार्यवाही में विलंब क्यों? रामावैली कॉलोनी में कोटवारी भूमि खरीदी बिक्री।

कार्यवाही में विलंब क्यों? रामावैली कॉलोनी में कोटवारी भूमि खरीदी बिक्री।
रामावैली कॉलोनी मे बिल्डर ने कोटवारी भूमि और भू जल शासकीय भूमि 5.871हैक्टेयर को प्लाटिंग कर बेचा
T &C द्वारा स्वीकृत मान चित्र के प्रतिकूल ग्रीन लैंड (पार्क ) मे व्यवसायिक कॉम्लेक्स एवं क्लब हाउस निर्मित किया गया , जिसे CMO बोदरी को किए गए शिकायत से जांच के दौरान अपने जांच प्रतिवेदन मे उक्त 4 मंजिला करोड़ों रुपयों के अवैध कॉम्प्लेक्स को कॉलोनी हित मे फावड़ा, फिनायल, एवं केमिकल रखने के लिए बनाया गया है , ऐसा बताया गया।वास्तविकता मे बिल्डर द्वारा ग्रीन लैंड मे उक्त अवैध बिल्डिंग को बनाकर बेचा गया है।
खसरा मानचित्र मे खसरा No. 72 दो जगहों पर अलग, अलग दर्शित है , एवं खसरा NO. 55 रकबा 1.007 एवं 56 रकबा 4.864 हैक्टेयर कुल रकबा 5.871 हैक्टेयर है RTI के तहत जानकारी प्राप्त है कि उक्त भूमि वर्तमान मे राजस्व अभिलेख मे रकबा ( 1.007+4.864) 5.871 हेक्टेयर भू जल शासकीय भूमी मद मे दर्ज है , जिसे बिल्डर द्वारा अन्य खसरा No. से बेच दिया गया।
रामावैली कॉलोनी का पूर्णता प्रमाण पत्र 2013 मे प्राप्त किया गया, उसके पश्चात कॉलोनी का देख रेख बिल्डर प्रकाश ग्वालानी के सुपुत्र दीपक ग्वालानी द्वारा रामावैली मेंटेनेंस फर्म द्वारा सन् 2022 तक किया गया, जिसमे करोड़ों रुपए का गबन किया गया , जिसका कॉलोनी वासियों को आज तक कोई ऑडिटेड हिसाब नही दिया गया, कॉलोनी वालों के विरोध उपरांत
बिल्डर सहकारी समिति का स्वयं संरक्षक बनकर सहकारी समिति को संचालित किया जा रहा है। सोसाइटी के पदाधिकारी के खिलाफ 4 FIR चक्रभाठा थाना मे विभिन्न प्रकरण मे दर्ज हैं।आज दिनांक तक आधिकारिक नियमो के तहत सोसायटी को हैंडओवर नही किया गया है । CMO बोदरी के मिलभगत से कॉलोनी वासियों को मिलने वाली सभी शासकीय सुविधाओं से वंचित रखा गया है ।
जांच समिति आयुक संभाग बिलासपुर द्वारा राजस्व संबंधित अनियमितताओं के लिए नियुक्त किया गया था , परन्तु जांच मे यह निर्णय लिया कि वेलफेयर सोसाइटी और को ऑपरेटिव सोसायटी के मध्य आपसी विवाद है, जांच अधिकारी गण राजस्व संबंधित जांच नही किए एवं
बिल्डर और CMO बोदरी / T/C के द्वारा किए गए अवैधानिक कृत्यों को छुपाने की कोशिश की गई ।
कॉलोनी मे किसी का भी सहकारी समिति से कोई विवाद नही है।
परन्तु जांच अधिकारी ने बनावटी कहानी बनाकर शासन को सहकारी समिति के साथ विवाद एवं आपसी झगड़े जैसी बात कहते हुए शासन को गुमराह किया
जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि जांच प्रतिवेदन को बिल्डर के साथ मिलकर बिल्डर के ही पक्ष मे बनाकर करोड़ों की हेरा फेरी को निजी स्वार्थ के लिए छुपाया गया है।
समिति ने निवेदन किया है कि/अन्य संस्था,के द्वारा निष्पक्ष जांच करवाने के लिए आयुक्त महोदय से निवेदन किया गया है ।
झूठा एवं बनावटी जांच प्रतिवेदन को देने वाले अधिकारियों के लिए उचित कार्यवाही किया जाए।



