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किसानों के लिए सबसे बड़े रिफॉर्म की तैयारी! घर बैठे बेच सकेंगे अपनी फसल-Farmer latest news Madhya Pradesh announce large-scale reforms in its Agriculture Produce Marketing act Dlop | business – News in Hindi

किसानों के लिए सबसे बड़े रिफॉर्म की तैयारी! घर बैठे बेच सकेंगे अपनी फसल

किसान अब घर से ही अपनी उपज बेच सकेंगे. जी हां, मध्य प्रदेश (Government of Madhay Pradesh) में फिलहाल इसकी शुरुआत हुई है. इसके बाद माना जा रहा है कि केंद्र सरकार भी इस तरह की बड़ी योजना ला सकती है.

किसान अब घर से ही अपनी उपज बेच सकेंगे. जी हां, मध्य प्रदेश (Government of Madhay Pradesh) में फिलहाल इसकी शुरुआत हुई है. इसके बाद माना जा रहा है कि केंद्र सरकार भी इस तरह की बड़ी योजना ला सकती है.

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश (Government of Madhay Pradesh) में किसानों की उपज अब निजी मंडियां भी खरीद सकती हैं. इसके लिए मंडी अधिनियम में संशोधन किया गया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि एक्सपोर्टर, व्यापारी, फूड प्रोसेसर आदि अब निजी मंडी को खोल सकते हैं. मंडी से जुड़े लोग किसान के घर जाकर या खेत में पैदावार को खरीदेंगे. मंडी समितियों का निजी मंडियों के काम में कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा. निजी मंडी के लिए लाइसेंस लेना होगा. पूरे प्रदेश के लिए एक लाइसेंस रहेगा. व्यापारी कहीं भी फसल खरीद सकेंगे. इसके बाद माना जा रहा है कि केंद्र सरकार भी इस तरह की बड़ी योजना ला सकती है.

प्रदेश के किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए निजी क्षेत्र का नया विकल्प मिल गया है. निजी मंडियां सरकारी से अलग संचालन करेंगी. मंडी का शुल्क भी केवल एक जगह पर ही लगाया जाएगा. किसानों को जहां फायदा दिखता है वहां अपनी उपज बेच सकते हैं. सरकार का दावा है कि मंडी नियमों में संशोधन का मकसद किसानों को बेहतर कीमतों और अपनी पसंद के मुताबिक अपनी उपज को बेचने की आजादी देना है. मुख्यमंत्री ने बताया कि हमने ई-ट्रेडिंग व्यवस्था भी लागू की है, जिसमें अन्य मंडियों के दाम भी किसानों को उपलब्ध रहेंगे.
लेकिन किसानों के हैं कई सवाल-राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य विनोद आनंद ने कहा कि कहीं निजी मंडियों के नाम पर किसानों का शोषण न होने लगे. निजी मंडी बनाने की अनुमति देने से पहले सरकार को प्रॉपर कानून बनाना चाहिए कि निजी व्यवस्था में कैसे किसान का हित सुरक्षित रहेगा.

आनंद ने बताया कि इससे पहले मध्य प्रदेश के ही होशंगाबाद में आईटीसी की अपनी निजी मंडी थी लेकिन वो सिर्फ किसानों से उनके उत्पाद की खरीद नहीं करती थी बल्कि बुआई के समय से ही मदद करती थी. किसानों को बीज तक उपलब्ध करवाती थी. हालांकि, बाद में वो बंद हो गई. इसलिए ऐसा नहीं कहा जा सकता कि पहली बार किसानों के लिए निजी क्षेत्र खोला गया है.आनंद ने सवाल किया कि शिवराज सिंह चौहान ने निजी मंडी खोलने के लिए जो आदेश दिया है क्या उसमें यह भी बताया है कि किसानों का हित कैसे सुरक्षित रहेगा. सरकार अगर वास्तव में किसानों का भला चाहती है तो वो क्यों नहीं खुद ही अच्छा दाम देकर उपज खरीद लेती. निजी क्षेत्र को मंडी बनाने का अधिकार देने का मतलब ये है कि सरकार किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है.

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First published: May 2, 2020, 1:49 PM IST



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