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इंदौर में बोलीं निर्भया की मां- हर रोज हमारे लिए चुनौती, फांसी की सजा सुना दी लेकिन होती नहीं

 

 

सबका संदेस न्यूज़ इंदौर-बेटी (निर्भया) ने पढ़ाई पूरी की फिर फिजियोथैरेपी का कोर्स किया। कराते व योगा भी सीखा। उसके लिए हर काम संभव था। जब घटना हुई तब वह 23 साल की थी। इन सात सालों में हमें हर पल वही खून से लथपथ चेहरा, शरीर पर चोट, ऐसा लगा जैसे जानवरों के बीच से खींचकर लाई गई हो, यही यादें दिमाग में घूमती रहती हैं। जब किसी भी लड़की के साथ अनाचार की खबर सुनते हैं तो बेटी (निर्भया) का चेहरा याद आ जाता है। अब तो फांसी होनी चाहिए। यह कहना है निर्भया की मां का। वे शनिवार शाम इंदौर पहुंचीं।  अपराधियों को फांसी सुनाई जाती है लेकिन होती नहीं। निर्भया के गुनहगारों को फांसी होना चाहिए।

कानून में खामियां : वकील निर्भया का केस लड़ रही एडवोकेट सीमा कुशवाह ने कहा कि सात साल से जो देरी हुई वह कानून के लूप होल से हुई। दोषियों को सजा दिलाने के लिए लड़ रहे हैं। 1 फरवरी को फांसी की उम्मीद है।

 

 

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सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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