
2.91 करोड़ का PMGSY पुल एक साल में ‘ढहने’ की कगार पर! कुर्मीगुंडरा में दरारों का सनसनीखेज खेल, ठेकेदार-विभाग की मिलीभगत की बू आ रही है?
दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक में कुर्मीगुंडरा गांव के पास प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के नाम पर जो 60 मीटर लंबा पुल बनाया गया, वह अब खुले में भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बन चुका है। दिसंबर 2024 में 2 करोड़ 91 लाख 54 हजार रुपये की भारी-भरकम रकम खर्च करके “पूर्ण” घोषित किया गया यह पुल महज एक साल बीतते ही दरारों की जाली में फंस गया है। गहरी होती दरारें, टूटते कंक्रीट, और बारिश में ढहने का खतरा – यह सब देखकर लगता है कि पुल नहीं, बल्कि जनता की कमाई का कबाड़ बनाया गया है!

पुल चीख-चीखकर अपने साथ हुए भ्रष्टाचार की कहानी चीख चीख कर कहता नजर आ रहा है– “ये पुल नहीं, लूट का पुल है!” निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री इतनी घटिया कि एक साल में ही पुल ‘खुद बोल’ रहा है – ठेकेदार ने मनमानी की, इंजीनियर ने आंखें मूंदीं, और विभाग ने सिर्फ फाइल पर साइन किए । स्थानीय लोग बताते हैं कि पुल बनते वक्त ही हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर विभाग से शिकायत की गई थी– लेकिन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज स्थिति इतनी खराब है कि भारी वाहन गुजरने से पुल हिलने लगता है, और ग्रामीणों को डर सता रहा है कि कहीं पुल ढहकर किसी की जान न ले ले।

जब इस घोटाले पर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना विभाग के जिला अधिकारी से सवाल किया गया, तो मिला सबसे ठंडा और घमंडी जवाब: “कोई दिक्कत नहीं है… काम अभी गारंटी पीरियड में है, ठेकेदार की जिम्मेदारी है!”

अरे वाह! 2.91 करोड़ रुपये जनता के टैक्स से निकालकर पुल बनवाया, और जब वह एक साल में टूटने लगा तो जवाब – “ठेकेदार देख लेगा!” क्या ये विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ फंड जारी करना और कमीशन लेना है? PMGSY के नियम साफ कहते हैं – 5 साल की डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में ठेकेदार मरम्मत करेगा, लेकिन निर्माण के दौरान क्वालिटी कंट्रोल, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन, मटेरियल टेस्टिंग विभाग की जिम्मेदारी है। अगर शुरू से ही घटिया काम हुआ, तो ये साफ मिलीभगत है – ठेकेदार ने पैसे बचाए, इंजीनियर ने नजरअंदाज किया, और ऊपर वाले हिसाब-किताब कर लिए!

छत्तीसगढ़ में PMGSY की सड़कें और पुल बार-बार ऐसी ही बदनामी का शिकार हो रहे हैं। कुछ महीने पहले ही अन्य जिलों में नई सड़कें उखड़ गईं, पुल बह गए – लेकिन यहां तो पुल बनते ही ‘ढहने’ की तैयारी में है! क्या प्रधानमंत्री के नाम पर चल रही इस योजना को छत्तीसगढ़ में लूट का अड्डा बना दिया गया है? ग्रामीणों का गुस्सा बिल्कुल जायज है – “हमारे टैक्स के पैसे से पुल बनवाकर ठेकेदार को अमीर बनाया जा रहा है, और हमारी जान जोखिम में डाली जा रही है!”

अगर विभाग अब भी “गारंटी पीरियड” का राग अलापता रहा, तो यह जनता के साथ विश्वासघात होगा।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना – गांवों को जोड़ने का सपना था, लेकिन दुर्ग के पाटन में यह लूट का पुल बन गया है। 2.91 करोड़ का यह पुल अब सिर्फ दरारों से नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की गहरी दरारों से भरा पड़ा है। सवाल अब सिर्फ पुल का नहीं – सवाल है कि क्या छत्तीसगढ़ में जनता के पैसे की लूट रुकेगी, या अधिकारी-ठेकेदार मिलकर और पुल ‘ढहाते’ रहेंगे? समय आ गया है सख्त कार्रवाई का – जांच हो, दोषी जेल जाएं, और जनता को जवाब मिले !

“कुर्मीगुंडरा पुल की सनसनीखेज हालत – दरारें देखिए और खुद फैसला कीजिए!”)


