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पैसे निकालने सुबह 10 बजे से बैंक में कतार लगा इंतजार, शाम 5 बजे तक नहीं आई बारी

जिले के किसानों के चेहरों पर एक तरफ जहां होली की खुशी है, वहीं दूसरी तरफ बैंक की लंबी कतारों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। 28 फरवरी को जिले के करीब 1.49 लाख किसानों के खातों में 745 करोड़ की अंतर राशि आने के बाद सोमवार को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में भारी गहमागहमी दिखी । होली के लिए पैसा निकालने पहुंचे किसानों की भीड़ इतनी अधिक थी कि बैंक परिसर छोटा पड़ गया।

सोमवार को बैंक खुलते ही सुबह 10 बजे से ही किसानों का तांता लग गया। कई किसान अपने गांवों से 40 से 50 किलोमीटर की दूरी तय कर बैंक पहुंचे थे। तेज धूप और उमस के बीच किसान अपनी बारी का इंतजार करते रहे। भीड़ का आलम यह था कि जो किसान सुबह 10 बजे लाइन में लगे थे, उन्हें शाम 5 से 6 बजे के बीच पैसा मिल पाया। इस दौरान कई किसान अव्यवस्था और लंबी प्रतीक्षा से परेशान होकर बिना पैसा निकाले ही बैरंग लौट गए। बैंक प्रबंधन के अनुसार, सामान्य दिनों में यहां 200 से 250 किसान ही लेन-देन के लिए पहुंचते थे, लेकिन सोमवार को यह संख्या 600 के पार पहुंच गई।

ग्राम खम्हरिया के रहने वाले किसान तुलस राम बघेल ने बताया कि सुबह 9 बजे से बैंक पहुंचा हुं। 40 किलोमीटर दूर से आने के बाद भी सुबह भीड़ लग चुकी थी। पासबुक को 9 बजे से जमा किया हुं दोपहर के 3 बजे के बाद भी बारी नहीं आई है। धूप में बैठकर इंतजार कर रहा हूं। वहीं ग्राम तमोरा से पहुंची बुधियारीन (70) ने बताया कि अपने बेटे के साथ सुबह 10 बजे से पहुंची हुं। भीड़ अधिक होने के कारण 4 बजे तक पैसा नहीं निकाल सके है। होली का सामान भी खरीदना है।

एक दिन में रिकॉर्ड 3 करोड़ का आहरण: प्रभारी बैंक मैनेजर राजेश चंद्राकर ने बताया कि भीड़ को देखते हुए भुगतान की व्यवस्था तेज की गई थी। उन्होंने बताया कि आम दिनों में बैंक से लगभग 2 करोड़ रुपए का आहरण होता था, लेकिन सोमवार को लगभग 600 किसानों ने करीब 3 करोड़ रुपए की राशि निकाली है।

काउंटर बढ़ाने की मांग की किसानों की भीड़ को देखते हुए बैंक प्रबंधन ने पहले ही दो काउंटर से चार काउंटर कर दिए है। इतने में भी सुबह से शाम तक भीड़ को देखते हुए किसानों ने भीड़ के बीच में बैंक प्रबंधन को उचित व्यवस्था करने के लिए और काउंटर बढ़ाने की मांग की है। इससे किसानों को पैसा निकालने में परेशानी नहीं हो और दिनभर का समय बैंक में पैसे निकालने में ही बिताने न पड़े।

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