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दुर्ग के जेवरा में 21.16 करोड़ का इंटेक वेल प्रोजेक्ट : तीन साल बाद भी अधूरा, गुणवत्ता-सुरक्षा पर गंभीर सवाल

दुर्ग – लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग द्वारा जेवरा क्षेत्र में चल रहे 21.16 करोड़ रुपये की लागत वाले इंटेक वेल निर्माण प्रोजेक्ट में गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही के आरोप लगे हैं। यह परियोजना जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण जल आपूर्ति को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन ठेकेदार की कथित ढिलाई और विभागीय उदासीनता के कारण यह लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप, स्थानीय निवासियों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

परियोजना की मूल समय-सीमा बहुत पहले समाप्त हो चुकी थी, लेकिन कार्य अभी भी धीमी गति से चल रहा है। स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी के अनुसार, ठेकेदार उमंग इन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा निर्माण में निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। खासकर रेत की गुणवत्ता इतनी घटिया बताई जा रही है कि इससे पूरी संरचना की मजबूती पर खतरा मंडरा रहा है।

सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन

निर्माण स्थल पर मजदूरों को बुनियादी सुरक्षा उपकरण जैसे हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, जूते या अन्य आवश्यक गियर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। साइट पर कोई बैरिकेडिंग नहीं है और खतरे के बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं, जिससे दुर्घटना का लगातार खतरा बना हुआ है।

पारदर्शिता का अभाव

प्रोजेक्ट साइट पर कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जबकि नियमों के अनुसार ठेकेदार का नाम, परियोजना की कुल लागत (21.16 करोड़), NIT नंबर, कार्यादेश की तिथि और निर्धारित समय-सीमा का विवरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना अनिवार्य है। इस कमी से पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मीडिया को रोका जाना

जब स्थानीय पत्रकारों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण करने और स्थिति की तस्वीरें/वीडियो लेने का प्रयास किया, तो कर्मचारियों द्वारा उन्हें रोक दिया गया। संबंधित एसडीओ से संपर्क करने पर ठेकेदार का नाम गलत बताया गया और कवरेज से मना किया गया। इससे विभाग और ठेकेदार के बीच संभावित साठगांठ के आरोप लग रहे हैं।

गौरतलब है कि पूर्व में भी दुर्ग जिले के PHE विभाग के अधिकारी को झूठी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आरोप में नोटिस जारी किया जा चुका है। ऐसे में इस प्रोजेक्ट की स्थिति विभागीय जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

स्थानीय निवासी इस देरी से परेशान हैं और मांग कर रहे हैं कि प्रोजेक्ट की तत्काल समीक्षा हो, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द स्वच्छ जल आपूर्ति बहाल की जाए।

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