छत्तीसगढ़

बिजली बिल नहीं चुकाया तो सरकारी दफ्तरों में नहीं लगेंगे स्मार्ट मीटर, सरकार को भेजा गया प्रस्ताव

रायपुर। प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर योजना लागू किया जा रहा है। दूसरी ओर विभागों का भारी बिजली बिल बकाया है। अब नई व्यवस्था के तहत सभी सरकारी विभागों को स्मार्ट मीटर चालू करने से पहले तीन माह की अनुमानित बिजली खपत के बराबर राशि अग्रिम जमा करनी होगी। शासन स्तर पर प्रस्ताव भेज दिया गया है और मंजूरी मिलते ही इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। साथ ही वर्षों से लंबित बिजली बिल की राशि किस्तों में वसूलने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।बिजली कंपनी के अनुसार सरकारी विभागों पर तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण स्मार्ट मीटर योजना की गति प्रभावित हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्री-पेड प्रणाली लागू करने का उद्देश्य ही समय पर भुगतान करना है, इसलिए बिना एडवांस जमा किए किसी भी कार्यालय में मीटर सक्रिय नहीं किया जाएगा।

बकाया बना सबसे बड़ी चुनौती

प्रदेश में 1 लाख 72 हजार से अधिक सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक करीब 1.16 लाख कार्यालयों में मीटर लगाए जा चुके हैं, जबकि शेष कार्यालयों में काम जारी है। लेकिन बकाया राशि जमा नहीं होने से योजना का संचालन अटक रहा है। इसी कारण परियोजना और राजस्व अधिकारियों की कई दौर की बैठक के बाद सख्त निर्णय लिया गया।

भुगतान नहीं तो कट सकती है बिजली

बिजली कंपनी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि लगातार बकाया रखने वाले विभागों पर अब सख्ती की जाएगी। भुगतान नहीं करने वाले कार्यालयों की बिजली आपूर्ति बंद करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। कुछ क्षेत्रों में स्कूलों को नोटिस जारी कर बिजली कटौती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

आरडीएसएस की सब्सिडी पर भी खतरा

अधिकारियों के अनुसार यदि समय पर बकाया वसूली नहीं हुई तो केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत मिलने वाली करीब 700 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि इस बार विभागीय स्तर पर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

गांवों के छोटे कार्यालय अब फोकस में

ब्लाक और जिला स्तर के अधिकांश सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। अब स्कूल, आंगनबाड़ी और ग्रामीण संस्थानों में तेजी से मीटर लगाए जा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक रोजाना लगभग छह हजार स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा रहे हैं।

आम उपभोक्ताओं को करना होगा इंतजार

सरकारी कार्यालयों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आम उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। बिजली विभाग का अनुमान है कि सभी घरेलू उपभोक्ताओं तक योजना पहुंचने में अभी एक वर्ष से अधिक समय लग सकता है।

फैक्ट फाइल

कुल सरकारी कार्यालय : 1,72,577

स्मार्ट मीटर लग चुके : 1,16,317

शेष कार्यालय : करीब 56 हजार

कुल बकाया : लगभग 3022 करोड़ रुपये

प्रतिदिन लगाए जा रहे मीटर : करीब 6 हजार

आम उपभोक्ताओं के प्रस्तावित मीटर : 55.63 लाख से अधिक

फैक्ट फाइल

पंचायत एवं ग्रामीण विकास – 643.57

नगरीय निकाय – 1935.43

स्कूल शिक्षा – 84.10

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी – 99.53

चिकित्सा – 45.64

गृह – 37.65

महिला एवं बाल विकास – 25.33

आदिम जाति एवं अल्पसंख्यक कल्याण – 24.73

आवास एवं पर्यावरण – 20.52

लोक निर्माण – 15.00

राजस्व – 12.66

वन – 9.56

उच्च शिक्षा – 5.75

सहकारिता – 3.14

कौशल विकास एवं रोजगार – 3.35

कृषि – 3.76

विधि एवं विधायी कार्य (कोर्ट) – 3.82

पशुपालन – 2.81

पर्यटन – 1.44

जेल – 1.36

उद्यानिकी – 1.34

खेल एवं युवा कल्याण – 1.13

वाणिज्यकर एवं आबकारी – 0.74

उद्योग – 0.79

ऊर्जा – 0.55

मत्स्य पालन – 0.52

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति – 0.40

परिवहन (आरटीओ) – 0.33

खनिज संसाधन – 0.28

श्रम – 0.22

अन्य विभाग – 8.21

कुल बकाया (लगभग) : 3,022.10 करोड़ रुपये

इनका क्या कहना है

इनका क्या कहना है

सहदेव ठाकुर, मुख्य अभियंता, बिजली कंपनी का कहना है कि बकाया राशि की रिकवरी के बाद ही प्री-पेड स्मार्ट मीटर पूरी तरह लागू किए जाएंगे और विभागों को तीन माह की अग्रिम राशि जमा करनी होगी।

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