
कवर्धा। पंडरिया में एक ही परिवार के तीन सदस्यों का अलग–अलग समय पर लापता हो जाना और उसके बाद एक अज्ञात नर कंकाल का मिलना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है। यह घटना निश्चित ही किसी की सोची समझी साजिश का हिस्सा है जिसे पंडरिया पुलिस थाना प्रभारी अपनी लापरवाही गैरजिम्मेदाराना नीति के चलते कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही!
लापता व्यक्तियों में पोचलू गोंड (उम्र 65 वर्ष), उनके सगे भाई नानहू गोंड तथा बीते चार माह से लापता प्रभु गोंड (उम्र 35 वर्ष) शामिल हैं ये सभी एक आदिवासी समाज से पंडरिया नगर स्थानीय लोग है! परिवार, समाज और मोहल्ले के लोग लगातार खोजबीन कर रहे हैं, किंतु आज तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला फिर अचानक उसी परिवार के घर से महज एक मिल दूर एक अज्ञात नर कंकाल मिलना बड़ी वारदात और अपराध पर सुस्त सासन प्रशासन आईना दिखा रही है। वहीं लगातार हत्याकांड से दहशत का माहौल बना हुआ है!
यह मामला सीधे तौर पर जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21) तथा समान संरक्षण के अधिकार (अनुच्छेद 14) से जुड़ा हुआ है। यदि एक गरीब परिवार के साथ इस प्रकार की घटनाएँ घटती हैं और प्रशासन निष्क्रिय बना रहता है, तो यह शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
पंडरिया में बढ़ते अपराध — सट्टा, जुआ, नशाखोरी, हत्या, लूट, चोरी और मारपीट — यह दर्शाते हैं कि कानून व्यवस्था कमजोर हो चुकी है। “भय मुक्त विकास” का दावा जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहा।
*हम प्रशासन से मांग करते हैं कि: -*
1 – तीनों लापता मामलों की उच्च स्तरीय, समयबद्ध और पारदर्शी जांच हो।
2 – मिले अज्ञात कंकाल की वैज्ञानिक जांच (डीएनए परीक्षण) कर सच्चाई सामने लाई जाए।
3 – क्षेत्र में बढ़ते अपराधों हत्या चोरी नशाखोरी जुआ सट्टा जैसे गंभीर अपराधों पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए।
4 – पंडरिया विधायक बाहरी दिखावे को छोड़ जमीन पर उतरे जल्द से जल्द पीड़ित परिवार से मिले उनके बच्चों के उज्जवल भविष्य का निर्णय ले और उन्हें न्याय दिलाए
*होगा उग्र आंदोलन – इन सभी विषयों को लेकर जल्द कार्यवाही नहीं होती तो पंडरिया से आरंभ होगा क्रमबद्ध जन आंदोलन – आनंद सिंह*
*जनता का विश्वास बहाल करना शासन प्रशासन में बैठे लोगों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। पंडरिया को भयमुक्त नहीं, बल्कि न्यायमुक्त होने से बचाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है – आनंद सिंह*

