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नेटो जैसे अरब-इस्लामिक सैन्य गठबंधन की फिर से क्यों हो रही है चर्चा?

अमेरिका के ईरान पर संभावित हमले की तैयारी के लिए सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की ख़बरों के बीच एक बार फिर से अरब-इस्लामी राजनीतिक और सैन्य गठबंधन के गठन का मुद्दा चर्चा में आ गया है.

राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने दिया था. उस समय उन्होंने मुस्लिम देशों को इसराइल की तरफ़ से पैदा हो रहे ‘बढ़ते विस्तारवादी ख़तरे’ के ख़िलाफ़ एकजुट होने का आह्वान किया था.

सितंबर 2025 में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने भी ” स्थापित करने की बात कही थी.

बीते साल 17 सितंबर को पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा समझौते पर हस्ताक्षार होने के बाद इस्लामिक नेटो बनाने के विचार ने ज़ोर पकड़ा है.

रेचेप तैय्यप अर्दोआन की हालिया सऊदी अरब और मिस्र की यात्राओं के मद्देनज़र अरब मीडिया में एक बार फिर से इस्लामिक नेटो के प्रस्ताव पर चर्चा की गई है.

अटकलें लगाई जा रही हैं कि प्रमुख अरब और मुस्लिम देशों को शामिल करते हुए एक बड़ा गठबंधन आकार ले सकता है.

हालांकि, कुछ रिपोर्टों में एक सऊदी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि तुर्की और पाकिस्तान को शामिल करते हुए सऊदी के नेतृत्व में ‘ ‘ बनाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है.

इन रिपोर्टों में यह भी सवाल उठाया गया है कि ऐसे गठबंधन के सामने मौजूद चुनौतियों को देखते हुए, असल में इसके गठन का विचार कितना व्यावहारिक है.

पांच फ़रवरी को रिपोर्ट किया कि अर्दोआन की रियाद और काहिरा की यात्राएं ‘तीन देशों को केंद्र में रखकर एक राजनीतिक और सैन्य इस्लामी गठबंधन’ बनाने की योजना के संदर्भ में हुईं, जो आगे चलकर परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और बड़ी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया तक फैल सकता है.

 वेबसाइट ने भी कहा, “राजनीतिक नज़दीकियों के अभूतपूर्व तरीके से बढ़ने और नज़रिए में समानता आने के बीच मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की को शामिल करने वाले एक क्षेत्रीय गठबंधन की रूपरेखा क्षितिज पर दिखाई दे रही है.”

राजनीतिक नज़दीकियों के अभूतपूर्व तरीके से बढ़ने और नज़रिए में समानता आने के बीच मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की को शामिल करने वाले एक क्षेत्रीय गठबंधन की रूपरेखा क्षितिज पर दिखाई दे रही है.”

हालांकि, कुछ  है कि अर्दोआन की ये यात्राएं किसी गठबंधन का संकेत नहीं बल्कि इस बात की बढ़ती समझ को दिखाता है कि क्षेत्र एक नए दौर की दहलीज़ पर है.

 ने कहा, “मिस्र-सऊदी-तुर्की के बीच बढ़ती नज़दीकी राजनीतिक समीकरणों के नए चरण को दिखाती है, जो मतभेदों को हल करने और साझा हितों को सबसे ऊपर रखने पर आधारित है…लेकिन यह अभी व्यापक रणनीतिक गठबंधन के स्तर तक नहीं पहुंची है.”

अंतरराष्ट्रीय क़ानून के  ने मिस्र की एक निजी स्वामित्व वाली वेबसाइट यूम7 से कहा, “मिस्र-तुर्की एक्सिस क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए एक व्यापक अरब-इस्लामी गठबंधन का आधार बन सकती है.”

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